दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखंड के लिए एक सुनहरा अवसर
देहरादून शहर कैसे चुनौतियां, भीड़ और पर्यावरण का संकट बोझ झेलेगा , गंभीर मुद्दा बनेगा आने वाले समय में
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखंड के लिए एक सुनहरा अवसर है. यह न केवल दूरी कम करेगा बल्कि दिलों को पहाड़ों से जोड़ेगा, कहते है जब विकास होता है तो पर्यावरण को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है आज 'देहरादून के लोगों को इस बात की तो खुशी है कि दिल्ली से देहरादून करीब हो जाएगा, लेकिन जो भीड़ इस शहर में आएगी उसके लिए सरकार का क्या प्लान है. उत्तराखंड के मशहूर हिल स्टेशन पहले से ही भीड़ की वजह से कई चुनौतियां झेल रहे हैं. पीक सीजन में मसूरी और नैनीताल में लोगों को घंटों तक ट्रैफिक जाम का दर्द झेलना पड़ता है. इस एक्सप्रेसवे के बाद यह दबाव और बढ़ेगा.' देहरादून के लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता ये है कि आने वाले समय में कहीं यहां ट्रैफिक की सुनामी न आ जाए. वर्तमान में भी इस राज्य की जितनी क्षमता है उससे ज्यादा पर्यटकों का ये बोझ झेल रहा है और अगर और भीड़ बढ़ेगी तो सरकार कैसे संभालेगी? क्या इसके लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम है. ज्यादा ट्रैफिक मतलब ज्यादा प्रदूषण विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं और विकास के नाम पर यहां के पर्यावरण का विनाश हो रहा है, दिल्ली के प्रदूषण का असर अब देहरादून में साफ दिखता है. इस साल की सर्दियों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब प्रदूषण का स्तर खतरनाक लेवल पर पहुंच गया, जिस शहर में लोग साफ हवा में साफ लेने आते थे, अब वहां की हवा भी अपनी पहचान खो चुकी है. 'जून 2025 तक अकेले देहरादून जिले में 13.42 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं, जो पूरे उत्तराखंड के कुल वाहनों का लगभग 36% है. विडंबना यह है कि जहां वाहनों की बाढ़ आ रही है, वहीं ट्रैफिक को संभालने वाला 'समर्पित बल' पिछले आठ वर्षों में 34% कम हो गया है. आज स्थिति यह है कि देहरादून में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के भरोसे औसतन 5,000 वाहनों का प्रबंधन है. मसूरी में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1200 के करीब पार्किंग है, ऐसे में अगर और गाड़ियां आएंगीं तो पार्क कहां होंगी, और इस भीड़ को कैसे संभाला जाएगा. पर्यटकों की भारी संख्या का सीधा मतलब है, ज्यादा कचरा. हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र बहुत संवेदनशील है. प्लास्टिक कचरे का निस्तारण और पानी की कमी उत्तराखंड के लिए बड़ी चिंता का विषय है. बिजली, पानी और सार्वजनिक सुविधाओं की मांग अचानक बढ़ने से स्थानीय निवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखंड के लिए एक सुनहरा अवसर है. यह न केवल दूरी कम करेगा बल्कि दिलों को पहाड़ों से जोड़ेगा. हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और नागरिक मिलकर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं. यदि हम 'पर्यटन' को 'जिम्मेदार पर्यटन' में बदल सकें, तभी यह एक्सप्रेसवे सही मायने में देवभूमि के लिए सौभाग्य लेकर आएगा.