सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक दल ने दोबारा नेता चुना
सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक दल ने दोबारा नेता चुना
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के बदलते समीकरणों का एक बड़ा उदाहरण है।
ताज़ा अपडेट (14 अप्रैल 2026) के अनुसार, नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और वे राज्यसभा की ओर रुख कर रहे हैं। इस इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है, जिससे उनका अगला मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है।
उनकी इस लंबी और उतार-चढ़ाव भरी सियासी पारी को इन प्रमुख बिंदुओं में देखा जा सकता है:
1. RJD से राजनीतिक सफर की शुरुआत सम्राट चौधरी ने अपने करियर का आगाज़ लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से किया था। उनके पिता शकुनी चौधरी लालू यादव के बेहद करीबी और दिग्गज नेता रहे हैं। सम्राट ने बहुत कम उम्र में ही मंत्री पद की शपथ ली थी, जो उस समय काफी विवादों में भी रहा था।
2. JDU का दौर और सत्ता का अनुभव लालू यादव का साथ छोड़ने के बाद वे JDU में शामिल हुए। नीतीश कुमार के शासनकाल में उन्होंने मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, बाद में उनके और नीतीश कुमार के बीच दूरियां बढ़ गईं, जिससे उन्होंने अपनी नई राह तलाशी।
3. भाजपा का चेहरा और 'पगड़ी' वाला संकल्प 2018 में भाजपा में आने के बाद सम्राट चौधरी ने खुद को पार्टी के सबसे आक्रामक चेहरे के रूप में स्थापित किया।
प्रदेश अध्यक्ष: 2023 में उन्हें बिहार भाजपा की कमान सौंपी गई।
संकल्प: उन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक सिर पर 'मुरेठा' (पगड़ी) बांधने का संकल्प लिया था, जो बिहार की राजनीति में एक बड़ा चर्चा का विषय बना।
4. उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री तक (अप्रैल 2026) जनवरी 2024 में जब भाजपा और JDU का पुनर्गठबंधन हुआ, तब वे उपमुख्यमंत्री बने। आज, 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद, भाजपा ने सम्राट चौधरी को अपना नेतृत्व सौंप दिया है। यह पहली बार होगा जब बिहार में भाजपा का अपना मुख्यमंत्री शासन करेगा।
क्यों अहम है उनकी ताजपोशी? पिछड़ा वर्ग (OBC) नेतृत्व: वे कुशवाहा समाज के बड़े नेता हैं, जो बिहार में 'लव-कुश' समीकरण का अहम हिस्सा है।
भाजपा की अपनी पहचान: सम्राट के सीएम बनने से भाजपा बिहार में नीतीश कुमार की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से अपना आधार मजबूत कर सकेगी।
आक्रामक राजनीति: लालू और तेजस्वी यादव के खिलाफ उनका आक्रामक रुख भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरता है।