21 जून को लगेगा बेहद दुर्लभ सूर्यग्रहण, 12 राशियों पर पड़ेगा घातक प्रभाव, जानिए सूतक का समय और उपाय !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : 21 जून की सुबह सूर्य ग्रहण लगेगा। इसका सूतक आज रात 10 बजे से लग जाएगा। सूतक काल के आरंभ के साथ ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण का समय रविवार सुबह से शुरू होकर दोपहर तक चलेगा। इस ग्रहण को भारत सहित दुनिया के कई देशों में देखा जाएगा। यह वलयाकार होकर दुर्लभ प्रकार का ग्रहण बताया जा रहा है। इस वर्ष दो सूर्य ग्रहण होंगे। यह पहला है इसके बाद अगला ग्रहण दिसंबर में लगेगा। आइये जानते हैं कल लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत के किन शहरों में, कितनी बजे और कितनी देर तक नज़र आएगा और इसकी क्या खासियत है।
सूर्य ग्रहण का सूतक, स्पर्श एवं मोक्ष का समय : सूतककाल 12 घंटे पूर्व शनिवार रात 10:14 बजे शुरू हो जाएगा। ग्रहण 21 जून रविवार को सुबह 10:14 बजे से शुरू होगा। मध्यम 12:14 बजे पर व मोक्ष दोपहर में 1:38 पर होगा। दोपहर 2 बजे तक मंदिरों के पट बंद रहेंगे। इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 25 मिनट की रहेगी। यह अधिकांश भू-मंडल पर दिखाई देगा। इसके बाद मौजूदा वर्ष के अंत में एक और सूर्य ग्रहण होगा।
जानिये इस सूर्य ग्रहण की विशेषताएं : आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या रविवार 21 जून रविवार को सूर्य ग्रहण पड़ेगा। पंडितों व ज्योतिषियों के मुताबिक यह खंडग्रास व साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा, जोकि कंकणाकृति खंड ग्रास सूर्य ग्रहण मृगशिरा एवं आद्रा नक्षत्र में रहेगा। सूर्य ग्रहण का ज्यादा असर मिथुन राशि के जातकों पर पड़ेगा। ज्योतिषाचार्य विनोद रावत ने बताया कि इस बार सूर्य ग्रहण मृगशिरा व आद्रा नक्षत्र और मिथुन राशि पर पड़ रहा है। इस कारण मिथुन राशि वालों को यह ग्रहण विशेष कष्टदायक होगा। वहीं शासन-प्रशासन पर यह ग्रहण शुभ नहीं है, क्योंकि सूर्य प्रशासन का प्रतिनिधि माना जाता है। जब-जब सूर्य एवं चंद्र ग्रहण पड़ते हैं तो उनका दीर्घकालीन प्रभाव विसर्ग राजनीति पर भी दिखता है। ग्रहण के समय 6 ग्रह बुध, शुक्र, गुरु, शनि, राहु, केतु वक्री रहेंगे। मिथुन राशि पर सूर्य बुध, राहु, चंद्र की युक्ति रहेगी जो कि अशुभ मानी जाती है।
सूर्य के पेट में समा जाएगा चंद्रमा : 21 जून को चंद्रमा सूर्य के पेट में समा जाएगा। इसके चलते रिंग ऑफ फायर का दृश्य नजर आएगा। राम श्रीवास्तव, खगोल शास्त्री ने बताया इस दृश्य को खुली आंखों से नहीं देखें। इस नजारे को देखने के लिए फिल्टर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे आप अपनी आंखों को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से सुरक्षित रख सकते हैं। इस दौरान तापमान कुछ कम होगा और पक्षी भ्रमित हो जाएंगे।
ग्रहण में इन सावधानियों का ध्यान रखें : बहराइच, उत्तर प्रदेश के पं अनन्त पाठक बताते हैं कि हिंदू धर्म के अनुसार ग्रहण के दौरान सूतक एक समयावधि होती है, जिसे अशुभ माना जाता है और इसलिए इस दौरान कई कार्यों को वर्जित माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का सूतक वृद्ध, बच्चों और रोगियों पर मान्य नहीं होता है।
ग्रहण सूतक में वर्जित कार्य : नया कार्य प्रारंभ करना, भोजन बनाना, खाना, मल-मूत्र, देवी-देवताओं की मूर्ति और तुलसी के पौधे का स्पर्श।दाँतों की सफ़ाई, बालों में कंघी आदि।
ग्रहण सूतक में ये कार्य अवश्य करें : ध्यान, भजन, ईश्वर की आराधना और व्यायाम करें। सूर्य ग्रहण में सूर्य से संबंधित चन्द्र ग्रहण में चन्द्र से संबंधित मंत्रों का जप करें।ग्रहण समाप्ति के बाद घर की शुद्धिकरण के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान के बाद सप्तधान्य, तिल, तिल तेल, लोहा काले वस्त्र दक्षिणा के साथ सूप में रखकर डोम या किसी शूद्र को दें छाया दान करें। भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और पूजा करें।सूतक काल समाप्त होने के बाद ताज़ा भोजन करें।सूतक काल के पहले तैयार भोजन को बर्बाद न करें, बल्कि उसमें तुलसी के पत्ते डालकर भोजन को शुद्ध करें।
ग्रहण में गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान : ग्रहण काल में ग्रहण को न देखें।घर से बाहर न निकलें।सिलाई, कढ़ाई एवं काटने-छीलने जैसे कार्यों को न करें।सुई व चाकू का प्रयोग न करें। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय चाकू और सुई का उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों को क्षति पहुंचाती है। हमारी पृथ्वी पर सूर्यादि ग्रहों का सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव सदैव से ही रहा है। सूर्यादि ग्रह नक्षत्रों पर घटने वाली घटनाओं से हमारी पृथ्वी अछूती नहीं रह सकती है। पृथ्वी पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभाव से मानव जीवन सदैव ही प्रभावित होता रहता है। यह बात किसी से छुपी नही है।
ग्रहण का पौराणिक महत्व : मत्स्यपुराण के अनुसार राहु (स्वरभानु) नामक दैत्य द्वारा देवताओं की पंक्ति मे छुपकर अमृत पीने की घटना को सूर्य और चंद्रमा ने देख लिया और देवताओं व जगत के कल्याण हेतु भगवान सूर्य ने इस बात को श्री हरि विण्णु जी को बता दिया। जिससे भगवान उसके इस अन्याय पूर्ण कृत से उसे मृत्यु दण्ड देने हेतु सुदर्शन चक्र से वार कर दिया। परिणामतः उसका सिर और धड़ अलग हो गए। जिसमें सिर को राहु और धड़ को केतु के नाम से जाना गया। क्योंकि छल द्वारा उसके अमृत पीने से वह मरा नहीं और अपने प्रतिशोध का बदला लेने हेतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रसता हैं, जिसे हम सूर्य या चंद्र ग्रहण कहते हैं।
ग्रहण और आपदाएं : भारतीय ज्यातिष की मेदिनी सिद्धांत अनुसार जब कभी एक पक्ष अर्थात १५ दिन में दो ग्रहण पड़ते हैं तो उसके ६ मास के भीतर भूकम्प आते हैं।सिद्धांत अनुसार जब कभी शनि का संबंध बुध या मंगल से अथवा पृथ्वी तत्व राशियों (वृष, कन्या व मकर) के स्वामियों से हो तो भूकंप की संभावना बढ़ जाती है।सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण व चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की कुंडली में सूर्यदेव अष्टमेश से पीड़ित हों। मंगल या बुध व शनि का आपस में संबंध हो या बुध व शनि या मंगल व शनि का संबंध लग्न, लग्नेश, अष्टम भाव या अष्टमेश से होता है।बुध वक्री या सूर्य से कम अंश का होता है या अस्त होता हो तो भूकंप की संभवना बढ़ जाती है।राहु व केतु के मध्य चार या अधिक ग्रह अशुभ स्वामियों के नक्षत्र पर होते हों गुरु-मंगल या गुरु-बुध का युति या दृष्टि संबंध होता हो तो भूकंप की संभवना बढ़ जाती है।
ग्रहण के समय ध्यान रखने योग्य बातें :-
ग्रहण के बाद नहाना चाहिए : यह भारतीय मान्यता है कि ग्रहण के पहले या बाद में राहु वा केतु का दुष्प्रभाव रहता है जो नहाने के बाद ही जाता है। इस मान्यता के पीछे भी एक विज्ञान है। सूर्य के अपर्याप्त रोशनी के कारण जीवाणु या कीटाणु ज्यादा पनपने लगते हैं जिसके कारण इंफेक्शन होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए ग्रहण के बाद नहाने से शरीर से अवांछित टॉक्सिन्स निकल जाते हैं और बीमार पड़ने के संभावना को कुछ हद तक दूर किया जा सकता है।
ग्रहण के दौरान उपवास : ग्रहण प्रेरित गुरुत्वाकर्षण के लहरों के कारण ओजोन के परत पर प्रभाव पड़ने और ब्रह्मांडीय विकिरण दोनों के कारण पृथ्वीवासी पर कुप्रभाव पड़ता है। इसके कारण ग्रहण के समय जैव चुंबकीय प्रभाव बहुत सुदृढ़ होता है जिसके प्रभाव स्वरूप पेट संबंधी गड़बड़ होने की ज्यादा आशंका रहती है। इसलिए शरीर में किसी भी प्रकार के रासायनिक प्रभाव से बचने के लिए उपवास करने की सलाह दी जाती है।
अन्य : वैदिक व पौराणिक ग्रथों में ग्रहण के संदर्भ में कहा गया है कि ग्रहण काल मे सौभाग्यवती स्त्रियों को सिर के नीचे से ही स्नान करना चाहिए, अर्थात् उन्हें अपने बालों को नहीं खोलना चाहिए। उन्हे जल स्रोतों से बाहर स्नान करना चाहिए। सूतक व ग्रहण काल में देवमूर्ति को स्पर्श कतई नहीं करना चाहिए। ग्रहण काल में भोजन करना, अर्थात् अन्न, जल को ग्रहण नहीं करना चाहिए। सोना, सहवास करना, तेल लगाना तथा बेकार की बातें नहीं करना चाहिए। बच्चे, बूढे, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को आवश्यकता के अनुसार खाने-पीने या दवाई लेने में दोष नहीं होता है।
सावधानी : गर्भवती महिलाओं को होने वाली संतान व स्व के हित को देखते हुए यह संयम व सावधानी रखना जरूरी होता है कि, वह ग्रहण के समय में नोकदार जैसे सुई व धारदार जैसे चाकू आदि वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस समय उन्हें प्रसन्नता से रहते हुए भगवान के चरित्र को स्मरण करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के एक दिन पहले और ग्रहण के दिन तथा इसके पश्चात् तीन से चार दिनों तक किसी शादी व मंगल कार्य को व किसी व्रत की शुरूआत तथा उसका उद्यापन वर्जित रहता है। अर्थात् देव व संस्कृति में आस्था रखने वालों को यथा सम्भव नियमों का पालन करना चाहिए। जिन्हें लगता है, कि इससे कुछ नहीं होता उन्हें ग्रहण से संबंधित पुराणों व साहित्यों को पढ़ना चाहिए फिर उसके निष्कर्ष को लोगों के मध्य प्रस्तुत करना चाहिए।
भूलकर भी नंगी आंखों से ना देखें : सूर्य ग्रहण को भूलकर भी खाली या नग्न आंखों से देखने की गलती नहीं करना चाहिये। यह आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे कुछ ही समय बाद आंखों की रोशनी जा सकती है। ग्रहण को देखने के लिए हमेशा सोलर चश्मा पहनें एवं जानकारों की सलाह के अनुसार ही सेफ डिवाइस का यूज करें।
कुछ विशेष योग:- रविवार के दिन पड़ने से चूड़ामणि ग्रहण कहा जाता है । कुछ समय के लिए यह कंकण आकृति में दिखाई देगा इसलिए इसे कंकणाकृति ग्रहण भी कहेंगे दूसरी ओर यह ग्रहण व्यतीपात महापात से व्याप्त होने के कारण जप-पाठ-स्नान-दान-मंत्र दीक्षा के लिए सिद्धि कारक अक्षय फलदायी एक दुर्लभ संयोग है आप इस महा योग में अधिकाधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।
निषेध:- सूतक काल एवं ग्रहण काल में बाल ,वृद्ध व रोगियों को छोड़कर भोजन का निषेध है । ग्रहण काल में शयन,भोजन शौच का पूर्ण निषेध है।
सावधानी : जल,दूध , दही आदि में पवित्रता के दृष्टि कोण से कुशा या तुलसी दल डाल दें।
कैसे करें दिन का प्रारम्भ:-21 जून को आपका जागरण ग्रहण के सूतक काल में होगा प्रातःकाल दैनिक क्रिया ,स्नानानादि से निवृत होकर धूप -दीप प्रज्वलित कर योग,मंत्र जाप,पाठादि साधना प्रारम्भ कीजिए ,ध्यान रहे मूर्तियों का स्पर्श न करें । देवार्चन ,पूजनादि ग्रहण समाप्ति होने पर स्नान के बाद ही होगा ।
सूर्य देवता को प्रसन्न करें : धार्मिक दृष्टि से सूर्य ही एक ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी चढ़ावे या बड़े अनुष्ठान की जरूरत नहीं पड़ती। इन्हें मात्र नमस्कार कर या जल का अर्घ्य देकर ही प्रसन्न किया जा सकता है। सूर्य को समस्त संसार को ऊर्जा प्रदान करने वाला देव भी माना जाता है। लौकिक कथाओं में मान्यता है कि धन, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और संपन्नता को पाना है तो रविवार को अर्घ्य देते समय भगवान सूर्य के 12 नामों का जाप करें। इससे भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनचाहा वरदान देते हैं। साथ ही कुंडली या आपकी राशि में सूर्य की स्थिति बलवान होती है।
12 राशियों पर ग्रहण का प्रभाव : यह ग्रहण मृगशिरा एवं आद्रा नक्षत्र अर्थात् मिथुन राशि में है ,मिथुन राशि के लिए यह विशेष प्रतिकूल है । वृष,मिथुन,कन्या,तुला,धनु व मीन राशि के लिए ग्रहण का फल प्रतिकूल है अन्य के लिए सामान्यतया ठीक है । जिनके लिए ग्रहण का फल प्रतिकूल है वे तथा गर्भवती देवियाँ ग्रहण न देखें । प्रतिकूल फल निवृत्ति के लिए जप ,पाठ,व लाल ,नीली,काली वस्तुओं का दान तथा ग्रहण काल में भगवान का स्मरण करें ।
भूमण्डल पर ग्रहण का यह होगा प्रभाव : किसानों को भारी संकट का सामना करना पड़ेगा,ग्रहण के समय मिथुन राशि में सूर्य-चन्द्र-बुध-राहु का चतुग्रही योग एवं मकर के नीचस्थ वक्री गुरु का वक्री शनि के साथ सम्बन्ध प्रतिष्ठित शासकों,सैन्य अधिकारियों तथा देश व विश्व के लिए बहुत भयावह है । अफगानिस्तान,चीन, जापान,पाकिस्तान व इण्डोनेशिया के कुछ भागों में जल प्रलय, तूफान ,भूकम्प रोगों आदि से जन -धन हानि की सम्भावनायें हैं । अनेक देशों में तनाव व युद्ध की स्थिति रह सकती है ।
अमावस्या श्राद्ध निर्णय : यहाँ अमावस्या तिथि 21 जून की अपेक्षा 20 जून को मध्यान्ह काल को अधिक व्याप्त कर रही है इसलिए अमावस्या तिथि जन्य वार्षिक क्षयाह एकोदिष्ट श्राद्ध 20 जून को किया जाना शास्त्र सम्मत है ।
सूर्य के इन 12 नामों का करें जाप
1- ॐ सूर्याय नम:।
2- ॐ मित्राय नम:।
3- ॐ रवये नम:।
4- ॐ भानवे नम:।
5- ॐ खगाय नम:।
6- ॐ पूष्णे नम:।
7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:।
8- ॐ मारीचाय नम:।
9- ॐ आदित्याय नम:।
10- ॐ सावित्रे नम:।
11- ॐ अर्काय नम:।
12- ॐ भास्कराय नम:।
14 दिसंबर को होगा दूसरा सूर्य ग्रहण
अब अगला सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को होगा : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण को इंदौर सहित देशभर में देखा जाएगा। शास्त्रों में ग्रहण का व्यापक असर बताया जा रहा है। इस मौके पर 6 ग्रह वक्रीय रहेंगे। इस वर्ष कुल छह ग्रहण हैं। इनमें से चार चंद्र ग्रहण, जबकि दो सूर्य ग्रहण हैं। दो सूर्य ग्रहण में यह एकमात्र है जिसका व्यापक असर देशभर में दिखाई देगा। दूसरा सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को होगा। यह ग्रहण मिथुन, कर्क, वृश्चिक व मीन राशि वालों के लिए अशुभ हो सकता है जबकि वृषभ, तुला, कुंभ व धनु राशि के लिए मध्यम है। मेष, सिंह, कन्या व मकर राशि वालों के लिए अनुकूल रहेगा।