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अध्यात्म
By   V.K Sharma 14/03/2019 :11:01
गुरुग्राम और फरीदाबाद मंडलों की भजन पार्टियों की ३ दिवसीय कार्यशाला
 
गुरुग्रामत्न सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा द्वारा गुरुग्राम में आज से गुरुग्राम व फरीदाबाद मण्डलों की भजन पार्टियों तथा खण्ड प्रचार कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई जिसमें प्रख्यात रंगकर्मी महेश वशिष्ठ मुख्य अतिथि थे। कार्याशाला के प्रतिभागीयों को संबोधित करते हुए वशिष्ठ ने कहा कि विभाग के लोक कलाकार अपनी रचनाओं में आम लोगों से जुड़ाव लेकर आएं।

लोगों से जुड़ाव होगा तो यह सवाल ही नही उठता कि वे आपकी ना सुने। उन्होंने कहा कि कलाकार को भीड़ का व्यक्ति बनकर रहना चाहिए अर्थात् वह जब अपनी कला का प्रदर्शन करे तब उसे लोग पहचाने और सामान्यत: वह साधारण व्यक्ति की तरह लोगों के बीच में रहे तभी उसकी कला का प्रदर्शन ज्यादा प्रभावी होगा। उन्होंने कहा कि अब प्रोद्यौगिकि का युग है और ऐसे में लोक कला के साथ तकनीक को अपनाकर हम हमारी लोक कला को और उभार सकते हैं। वशिष्ठ ने कहा कि वाद्य यंत्रों में भी तकनीक आ गई है, जिसका प्रयोग करके कलाकार व गायकों की संख्या कम होने के बावजूद भी वे एक साथ गई वाद्य यंत्रों की धुन बजा सकते हैं। प्रोद्यौगिकि में इन दिनों आ रहे नए-नए गैजेट्स का जिक्र करते हुए वशिष्ठ ने कहा कि ये गैजेट हमें मशीन बना रहे हैं लेकिन कला और मशीन का कोई मेल नही है। उन्होंने सभी प्रतिभागी लोक कलाकारों को शारीरिक श्रम करने और प्रकृति से जुडऩे की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेगा वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ होगा। इसी प्रकार, प्रकृति इंसान का सबसे बड़ा गुरू है, इसके साथ जितना जुड़ाव होगा, उतना ही हम कला को सृजित कर पाएंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कहा कि सबसे पहले हमें अपनी मौजूदा परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए। चाहे कितनी भी विकट परिस्थितियां आए, कलाकार खुश होकर काम करे। जैसा हमारा जीवन है उसी में हम राहत महसूस करें तो हमारे अंदर खुशी पैदा होगी। आज की कार्यशाला में राजकीय महाविद्यालय सैक्टर-14 के संगीत प्राध्यापक लोकेश ने भी सभी प्रतिभागियों को संगीत की धुनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।



V.K Sharma
Editor in Chief
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