अधिकार देना ही सही मायने में महिला सशक्तिकरण है : सोनिया बोहत
असंध/करनाल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर करनाल के सालवन गांव निवासी अधिवक्ता सोनिया बोहत को मिला वूमन एम्पावरमेंट का विशेष अवार्ड नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की महान हस्तियों ने की शिरकत इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, फिल्म जगत की हस्तियां, मॉडलिंग, शिक्षा जगत, समाज सेवा, पत्रकारिता इत्यादि क्षेत्रों से कुछ महान हस्तियों को अवार्ड से नवाजा गया, इस कार्यक्रम का आयोजन डीडी न्यूज, डीडी दिव्या, आज की दिल्ली, वाईपी फिल्म प्रोडक्शन हाउस, आलंबन चैरिटी ट्रस्ट की तरफ से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस उपलब्धि पर उन्हें क्षेत्र के समाजसेवियों व अधिवक्ताओं, शिक्षा शास्त्रियों ने बधाई दी। अधिवक्ता सोनिया बोहत कार्यक्रम में बताया की महिला सशक्तिकरण के बारे में जानने से पहले हमें यह भी जान लेना चाहिए, कि महिला सशक्तिकरण का क्या तात्पर्य है, किसी व्यक्ति की क्षमता से है, जहां महिलाएं परिवार समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपनी निर्माता खुद हो, अपनी निजी स्वतंत्रता का फैसला लेने का अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण हैं, परिवार समाज की सभी बन्दिशों को तोड़ते हुए अपने भविष्य की निर्माता
खुद बने, अपने फैसले अधिकार, विचार, शिक्षा दिमाग पहलू से महिलाओं को अधिकार देना स्वतंत्र बनाने के लिए हैं, समाज में सभी क्षेत्रों में पुरुष और महिला दोनों को बराबरी में लाना होगा, समाज, परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए महिला सशक्तिकरण बेहद जरुरी है, इसलिए महिलाओं को स्वच्छ वातावरण की बहुत जरूरत है, जिससे कि वह हर क्षेत्र में अपना खुद का फैसला ले सके, देश परिवार, समाज किसी के लिए भी हो विकास बहुत जरूरी हैं।
इस देश में आधी आबादी महिलाओं की है, इसलिए देश को पूरी तरह से विकसित बनाने में महिलाएं की भूमिका बहुत जरुरी हैं। राष्ट्र निर्माण में महिला अहम योगदान प्रदान कर सकती है, 21वीं सदी की नारी को नवीन मूल्यों को जानना होगा, समाज में परिवर्तन के लिए आगे आना होगा तभी महिला सशक्तिकरण का सपना साकार हो सकता है। वैदिक काल में नारी ने पुरुष के समक्ष सम्मानजनक स्थान प्राप्त था, लेकिन दुर्भाग्यवश से नारी स्थिति में परिवर्तन आया। 21वीं सदी की नारी को नवीन मूल्यों के सृजन एवं नूतन समाज कि संरचना के लिए आगे आना होगा, नारी की सम्मानित भूमिका तभी साकार हो सकती है। सविधान में महिला को पुरूष के समान अधिकार तो है परंतु समाज में आज भी समान अधिकार क्यों नहीं मिले हैं। कहने को तो महिलाएं राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री भी बनी है, लेकिन फिर भी आज तक परिवर्तन पूरी तरह नजर नहीं आया, महिला सशक्तिकरण तभी संभव हो सकता है, जब महिलाओ में अपने अधिकारों के प्रति सचेत होने व स्वाभिमान की भावना जागृत होगी तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा तथा महिलाएं मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 50 प्रतिशत महिलाओं की आबादी है, लेकिन फिर भी हमारे अंदर कहीं न कहीं सशक्तिकरण की कमी है। समाज में महिलाओं को सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी के बारे में बताया जाता है तथा उनको उनके अधिकारों से दूर रखा जाता है। जब तक
महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर रखा जाएगा तब तक हम राष्ट्र निर्माण में अच्छी भूमिका नहीं निभा सकती। भारत के लोग इस देश को मां का दर्जा देते हैं, लेकिन मां के असली अर्थ को कोई नहीं समझ पाता।