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राजनीति
By   V.K Sharma 08/01/2019 :14:19
2019 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा और एतिहासिक ऐलान, सवर्ण जातियों को मिलेगा 10% आरक्षण, कांग्रेस, आप और एनसीपी देगी समर्थन !
 

 

 

 

 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा  :  केंद्र ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन बिल मंगलवार को सदन में पेश किया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे पटल पर रखा। इस बिल को बसपा, कांग्रेस, आप और एनसीपी ने समर्थन देने की बात कही है। उधर, डीएमके ने इसका विरोध किया है। लोकसभा में आज विंटर सेशन का आखिरी दिन है। सोमवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फैसला किया गया है कि अब सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. ये आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दिया जाएगा. बता दें कि 2018 में SC/ST एक्ट को लेकर जिस तरह मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया था, उससे सवर्ण खासा नाराज बताया जा रहा था. माना जा रहा है कि मंगलवार को मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल संसद में पेश कर सकती है. बता दें कि मंगलवार को ही संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है. इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, "सवर्ण आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले लिए गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया नहीं लगता है। यह चुनावी स्टंट और राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर भाजपा सरकार यह फैसला चुनाव के और पहले लेती।" उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के अथक परिश्रम और त्याग के बाद ही गरीब और शोषित वर्ग के दलित और आदिवासियों को आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है। इसलिए एससी-एसटी ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात के हिसाब से आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। आरक्षण 49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस फैसले से विभिन्न वर्गों का कुल आरक्षण 49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय कर रखी है। भाजपा का वोट बैंक मानी जाती रही सवर्ण जातियां आरक्षण की मांग करती रही हैं। जनरल कैटेगरी में सवर्णों के अलावा मुस्लिम और अन्य धर्मों के लोग भी शामिल होंगे। आरक्षण के लिए परिवार की अधिकतम सालाना आय 8 लाख रुपए तय की गई है। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम एससी- एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटे जाने से नाराज सवर्णों को लुभाने के लिए उठाया है। इसका खामियाजा पार्टी को हाल ही में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाकर भुगतना पड़ा था।

आरक्षण के लिए 5 प्रमुख मापदंड :  1. परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 2. परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। 3. आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए। 4. म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए। 5. नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो। अभी संविधान में जाति और सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 15, 16 में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। अभी एससी को 15%, एसटी को 7.5% और ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जा रहा है। अब तक सवर्णों, मुस्लिमों, सिखों, ईसाइयों सहित किसी भी धर्म को आरक्षण नहीं मिलता है। अड़चनें बरकरार: सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं हो सकता संविधान विशेषज्ञ डाॅ. आदिश चंद्र अग्रवाल ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने 2006 मंय साफ किया था कि किसी भी सूरत में आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता। 2018 में भी यह फैसला बरकरार रखा गया। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी ने कहा कि सामान्य वर्ग के संपन्न लोगों के लिए अवसर कम होंगे तो वे कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो मामला दोबारा अटक सकता है। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी ने कहा कि सामान्य वर्ग के संपन्न लोगों के लिए अवसर कम होंगे तो वे कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो मामला दोबाराअटक सकता है। संसद में यह संभव: 67% सांसदों का समर्थन जरूरी, कांग्रेस ने भी समर्थन की बात कही संविधान में संशोधन के लिए दोनों सदनों के 67% सांसदों का समर्थन जरूरी है। लोकसभा में एनडीए के 59%, जबकि राज्यसभा में 36% सांसद हैं। यानी अपनेदम पर बिल पास कराना नामुमकिन है। कांग्रेस, आप, एनसीपी ने समर्थन की बात कही। लोकसभा में इन तीनों के 11%, राज्यसभा में 23% सांसद हैं। यानी लोकसभा में 70% समर्थन से बिल पास हो सकता है। राज्यसभा में आंकड़ा 59% पर अटक सकता है। 27 साल में कई कोशिशें: नरसिम्हा सरकार समेत 9 राज्यों के फैसले अटक गए थे 1991 में केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10% कोटा देने का फैसला किया था। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। 2003 में भाजपा, 2006 में कांग्रेस ने इसके लिए मंत्री समूह बनाए थे। आरक्षण की मांग को लेकर मराठा, गुर्जर और जाट जैसे समुदाय लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में 10% आरक्षण के कानून भी बने। लेकिन, संविधान आड़े आ गया।

इन सभी को मिलेगा लाभ : जिनकी सालाना आय 8 लाख से कम हो जिनके पास 5 हेक्टेयर से कम की खेती की जमीन हो  जिनके पास 1000 स्क्वायर फीट से कम का घर हो  जिनके पास निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन हो जिनके पास 209 गज से कम की निगम की गैर-अधिसूचित जमीन हो जो अभी तक किसी भी तरह के आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते थे

संविधान में करना होगा बदलाव : आपको बता दें कि मोदी सरकार ये आरक्षण आर्थिक आधार पर ला रही है, जिसकी अभी संविधान में व्यवस्था नहीं है. संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण की बात कही गई है, ऐसे में सरकार को इसको लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा. सरकार के इस फैसले को लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए देखा जा रहा है. सरकार इसके लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा. दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा.

बीजेपी से नाराज थे सवर्ण : आपको बता दें कि पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में बदलाव करने का आदेश दिया था, तब देशभर में दलितों ने काफी प्रदर्शन किया था. जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था. माना जा रहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले से सवर्ण काफी नाराज हो गए हैं. दलितों के बंद के बाद सवर्णों ने भी भारत बंद का आह्वान किया था. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. यहां पढ़ें सभी राजनीतिक दलों, नेताओं की प्रतिक्रियाएं...

 

कांग्रेस : मोदी सरकार के इस कदम को कांग्रेस ने चुनावी जुमलेबाजी बताया है और कहा है कि आम चुनाव से पहले सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘क्या आपने सरकार ने इस बारे में चार साल और आठ महीने तक सोचा? निश्चित तौर पर आचार संहिता लागू होने से तीन महीने पहले इस चुनावी जुमलेबाजी के बारे में सोचा गया. आप जानते हैं कि आप कोटा की सीमा को 50 फीसदी से ज्यादा नहीं कर सकते. इसलिए आप यह दिखाना चाहते हैं कि आपने प्रयास किया, लेकिन नहीं हो पाया.’’

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले : केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि सरकार का ये फैसला काफी अच्छा है, इससे समाज के एक बड़े तबके को लाभ होगा. उन्होंने कहा कि सवर्णों में भी कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं.

हालांकि सवर्णों के आरक्षण पर उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना भी साधा. राजबब्बर ने कहा कि कहीं ये फैसला भी जुमलेबाजी साबित न हो जाए. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले से कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कोई नुकसान नहीं होगा.

 

आरक्षण के दायरे में ये सवर्ण आएंगे :

-आठ लाख से कम आमदनी हो

-कृषि भूमि 5 हेक्टेयर से कम हो

-घर है तो 1000 स्क्वायर फीट से कम हो

-निगम में आवासीय प्लॉट है तो 109 यार्ड से कम जमीन हो

-निगम से बाहर प्लॉट है तो 209 यार्ड से कम जमीन हो.

 

क्या है अनुच्छेद 15 और 16?

आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में संशोधन करना होगा.

अनुच्छेद 15- सामाजिक समता का अधिकार दिया गया है जिसके अनुच्छेद 15(4) में आरक्षण संबधी प्रावधान है.

अनुच्छेद 15 (4) - इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खण्ड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिये या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी.

अनुच्छेद 16- समता के अधिकार के अंतर्गत आता है. अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के अवसर की समता की बात करता है.

अनुच्छेद 16(4) - राज्य पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग को जिसका सरकारी सेवाओं पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीँ है, पदों के आरक्षण के लिए व्यवस्था कर सकता है. (मण्डल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ऐसी व्यवस्था की जा चुकी है.)

अनुच्छेद 16(5) -किसी धार्मिक या साम्प्रदायिक संस्था के कार्य से सम्बंधित कोई पद उस विशिष्ट धर्म या विशिष्ट सम्प्रदाय के व्यक्ति के लिए आरक्षित किया जा सकता है, जिससे वह संस्था संबद्ध है.

 




V.K Sharma
Editor in Chief
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