14 साल से कोमा में पड़ी महिला ने दिया बच्चे को जन्म, हॉस्पिटल हैरान, सेक्शुअल अब्यूज का जताया जा रहा शक !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : अमेरिका के अरिजोना
स्थित हेसिंडा हेल्थ केयर में करीब 14 साल से कोमा में पड़ी एक महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म
दिया है। इसके बाद से महिला से सेक्शुअल अब्यूज की आशंका जताई जा रही है और मामले
की जांच शुरू कर दी गई है। इसी हॉस्पिटल के स्टाफ पर पहले भी बदसलूकी के मामले
सामने आ चुके हैं। खबरों के मुताबिक, 29 दिसंबर को उसके प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद स्टाफ ने
उसके धीरे-धीरे कराहने की आवाज सुनी। उस वक्त तक उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
फिर बाद में पता लगा कि महिला तो प्रेगनेंट है। बता दें कि महिला ने अब एक लड़के
को जन्म दिया है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। हॉस्पिटल का स्टाफ भी
शक के दायरे में है। मामले की वजह से बाकी हॉस्पिटल्स में भर्ती मरीजों की चिंताएं
भी बढ़ गई हैं। इस घटना की हर तरफ निंदा भी हो रही है। अब महिला के लिए एक मानव
अधिकार कार्यकर्ता ने आवाज उठाई है। टाशा मेनेकर नाम की वह महिला वकील भी हैं।
उन्होंने मांग की है कि हॉस्पिटल में काम करनेवाले मर्द स्टाफ का डीएनए टेस्ट
करवाया जाना चाहिए। मामला का पता ऐरिजोना के गवर्नर डग डेजी को भी लगा। उन्होंने
इसपर दुख जाहिर किया और हैसिएंडा हेल्थकेयर को निर्देश दिया है कि मरीजों की
सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा जाए।
मरीजों से अभद्रता के कारण चर्चा में आया था हॉस्पिटल
- बच्चे को जन्म देनी वाली महिला पिछले 14 साल से हेल्थ केयर सेंटर
में भर्ती है। पानी में डूबने से उसके ब्रेन को नुकसान हो गया था। हालत ये है कि
उसे 24 घंटे देखभाल की जरूरत
है।
- स्टाफ दिन में कई बार महिला का चेकअप करता है। अब स्टाफ पर
उठते यौन उत्पीड़न के सवालों के कारण हेल्थ केयर सेंटर ने नियमों में बदलाव किए
हैं।
अब पुरुष स्टाफ के साथ महिलाकर्मी भी मौजूद रहेंगी
- हेल्थ केयर सेंटर के मुताबिक, चेकअप के दौरान पुरुष
स्टाफ के साथ अब महिला स्टाफ भी वहां मौजूद रहेंगी। स्टाफ की संख्या बढ़ाने के साथ
मरीजों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा।
- सेंटर के प्रवक्ता के मुताबिक, इस मामले की जांच में
स्टाफ हर संभव मदद कर रहा है। ये नियम एरिजोना डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ सर्विसेस की
ओर से लागू करवाए हैं।
5 साल पहले रोकी गई थी फंडिंग
- हॉस्पिटल में इससे पहले भी कर्मचारियों पर अभद्रता के आरोप
लग चुके हैं। इसके कारण दिसंबर 2013 में इसकी फंडिंग पर रोक लगा दी गई थी।
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के एक कर्मी ने कई
मरीजों को अपशब्द कहे थे। उन पर लैंगिक टिप्पणी भी की थी।
- ऐसी घटनाओं के कारण हॉस्पिटल को सरकारी आंकड़ों में औसत से
भी निचले स्तर का हेल्थ केयर सेंटर बताया गया था और एक स्टार रेटिंग मिली थी।