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राजनीति
By   V.K Sharma 07/12/2018 :13:58
Rajasthan Assembly Election 2018. ताबड़तोड़ रैलियों के बाद अब जनता की बारी, राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों पर आज सुबह आठ बजे से वोटिंग जारी है , 2 बजे तक 42.17% कांग्रेस और बीजेपी में टक्कर !
 









 


राजस्थान (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : राजस्थान में 200 में 199 सीटों  पर आज सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो गया है। 2,274 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी. पहले एक घंटे में 6.23 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे। यह आंकड़ा सवा ग्यारह बजे तक 21.91 प्रतिशत से अधिक हो गया। कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों (EVM) के काम नहीं करने की खबरें भी आई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje), कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) व अन्य प्रमुख नेता अब तक अपना वोट डाल चुके हैं।  मतदाताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा हैं जिससे मतदान केन्द्रों पर सुबह से ही लम्बी लम्बी कतारे लगी। कहीं से किसी अप्रिय घटना के समाचार नहीं हैं। हालांकि अजमेर में एक पीठासीन अधिकारी की अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार जयपुर के किशनोपाल, विद्याधरनगर, मालवीयनगर, हवामहल, सांगानेर, आदर्शनगर, मानसरोवर, चाकसू, बस्सी क्षेत्र के मतदान केन्द्र पर ईवीएम मशीन में तकनीकी खराबी आने के कारण मतदान शुरु होने में थोड़ी देरी हुई। इस दौरान केन्द्रों के आगे मतदाताओं को मतदान शुरु होने का इंतजार करना पड़ा। इसी तरह जोधपुर जिले में सरदारपुरा एवं शेरगढ क्षेत्र के अलावा चित्तौड़गढ, धौलपुर तथा अन्य जिलों के कुछ मतदान केन्द्रों पर भी ईवीएम मशीनों में तकनीक खराबी की सूचनाएं मिली हैं। इस कारण कई मतदान केन्द्रों पर ईवीएम मशीनों को बदला भी गया हैं। मतगणना 11 दिसंबर को होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए कुल 4 करोड़ 74 लाख 37 हजार 761 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें दो करोड़ 47 लाख 22 हजार 365 पुरुष एवं दो करोड़ 27 लाख 15 हजार 396 महिला मतदाता हैं। प्रथम बार मतदान कर रहे युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख 20 हजार 156 है। राज्य में सेवानियोजित मतदाताओं की संख्या एक लाख 16 हजार 456 है, जिनको ईटीपीबीएस के माध्यम से पोस्टल बेलेट पेपर प्रेषित किए जा चुके हैं। कुल 2274 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें से 194, भाजपा से 199 उम्मीदवार, बहुजन समाज पार्टी से 189, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से एक, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से 16 एवं कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (मार्कसिस्ट) से 28 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, 817 अमान्यता प्राप्त दलों के प्रत्याशी एवं 830 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव में ईवीएम के प्रयोग के साथ-साथ संपूर्ण प्रदेश में वीवीपैट मशीनों का प्रयोग भी पहली बार किया जा रहा है। वीवीपैट मशीन से मतदाता इस बात की पुष्टि कर सकेगा कि उसने जिस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है, उसका वोट उस उम्मीदवार के पक्ष में गया है या नहीं। 68 हजार 894 बीयू, 59 हजार 160 सीयू एवं 68 हजार 303 वीवीपैट मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा रिजर्व के रूप में भी पर्याप्त मशीनें उपलब्ध हैं। राज्य में कुल 4 लाख 36 हजार 125 मतदाता विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग जन हैं। मतदान केंद्रों पर उनकी सुविधा के लिए सभी मतदान केंद्रों पर रैम्प्स, व्हील चेयर तथा सहायता के लिए एक लाख 3 हजार 166 स्काउट गाइड, एनएसएस और एनसीसी के वालंटियर लगाए गए हैं। नवाचार के रूप में 259 समस्त महिला प्रबंधित मतदान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें मतदान दलकर्मी, सुरक्षाकर्मी आदि सभी महिलाएं ही होंगी।199 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कुल 51 हजार 687 मतदान केंद्रों की स्थापना की गई है, इनमें से 209 आदर्श मतदान केंद्र हैं। आनंद कुमार ने बताया कि चुनाव आचार संहिता का पालन कठोरता से किया गया है और शिकायतों पर कार्रवाई भी की जा रही है। विभिन्न स्तरों पर आने वाली सभी शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। सी-विजिल एप से अब तक तीन हजार 784 से अधिक शिकायतें इसमें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 3098 शिकायत सही पाई गई हैं। वहीं, रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जांच के पश्चात 491 शिकायतें ड्रॉप की गई हैं। वर्तमान में डीसीसी स्तर पर एक शिकायत एवं 28 शिकायतें जांच की प्रक्रिया में हैं। राज्य मे कुल 13 हजार 382 क्रिटिकल मतदान केंद्र हैं, जिनमें से 4 हजार 982 मतदान केंद्रों पर माइक्रो आब्जर्वर, तीन हजार 948 मतदान केंद्रों पर वीडियोग्राफर, तीन हजार 138 मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग और सात हजार 791 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बल (सीएपीएफ) की तैनाती की गई है। राज्य में कुल 387 नाके और चेक पोस्ट लगाए गए हैं। राज्य में 1,44,941 पुलिस बल तैनात किया गया है। इनमें 640 कंपनियां सीआरपीएफ की हैं। राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद चार हजार 203 अवैध हथियारों, एक हजार 450 कारट्रिज, 370 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थों की जब्ती की गई है। राज्य में कुल एक लाख 74 हजार 711 हथियार लाइसेंस हैं। अब तक कुल एक लाख 60 हजार 279 लाइसेंस हथियार जमा करा चुके हैं। सीआरपीसी के निरोधात्मक प्रावधानों के तहत दो लाख छह हजार 632 प्रकरणों में तीन लाख 94 हजार 911 व्यक्तियों को पाबंद किया गया है। वहीं, दो लाख 14 हजार 455 गैर जमानती वारंटों की तामील कराई गई है।

 

झालरापाटन : राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को उनके खिलाफ उम्मीदवार बनाया है. बाड़मेर के शिव क्षेत्र से विधायक मानवेंद्र ने सितंबर में भारतीय जनता पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी. 17 अक्टूबर को मानवेंद्र ने बीजेपी को बड़ा झटका देते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया था. पिछले चुनाव में वसुंधरा राजे ने कांग्रेस की मीनाक्षी चंद्रावत को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. वसुंधरा को 1,14,384 तो वहीं मीनाक्षी चंद्रावत को 53,488 वोट मिले थे. राजस्थान में साल 1998 से ही हर चुनाव के बाद सीएम पद की गद्दी मुख्य विपक्षी पार्टी को मिल जाती है. ऐसे में मुख्यमंत्री वसुंधरा के सामने इस मिथक को तोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है. वसुंधरा राजे सिंधिया 2013 में प्रदेश की 13वीं मुख्यमंत्री बनीं थीं. वसुंधरा राजे इस कार्यकाल को मिलाकर दूसरी बार सीएम पद पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगी. वह प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री भी हैं. ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली वसुंधरा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1984 में बीजेपी ज्वाइन करने के बाद की थी.

 

टोंक : राजस्थान की टोंक विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की उम्मीदवारी से रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है. मुस्लिम बहुल इस सीट पर 2013 के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी जबकि कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा था. भारतीय जनता पार्टी ने पायलट के खिलाफ टोंक विधानसभा सीट पर अपने एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान को मैदान में उतारा है. पार्टी ने इससे पहले यहां से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी. लेकिन कांग्रेस ने जब मुस्लिम बहुल टोंक सीट से पायलट को उतारने की घोषणा की तो बीजेपी ने अपने प्रत्याशी को बदलकर यूनुस खान को उतार दिया. वसुंधरा राजे सरकार में कद्दावर मंत्री रहे यूनुस खान इस समय डीडवाना से विधायक है. सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के युवा तेजतर्रार नेता हैं और प्रदेश कांग्रेस की कमान अभी उन्हीं के हाथों में है. इस कारण कांग्रेस पार्टी की तरफ से सचिन पायलट मुख्यमंत्री के उम्मीदवार भी माने जा रहे हैं. पायलट राजस्थान के दौसा लोकसभा सीट से पहली बार 2004 में सांसद बने और 2009 में वो अजमेर से लोकसभा के लिए दूसरी बार चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी वो अजमेर से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सचिन पायलट केन्द्र में भी भूमिका निभा चुके हैं. वो यूपीए-2 में कॉरपोरेट मंत्री के पद पर थे. सचिन पायलट को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता राजेश पायलट कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता थे.

 

 

सरदारपुरा : कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं. जोधपुर जिले की सरदारपुरा सीट से गहलोत विधायक हैं. पिछले चुनाव में उन्होनें बीजेपी शंभू सिंह खेतासर को हराया था. माना जा रहा है कि पिछली बार के चुनाव की तरह इस बार भी दोनों नेताओं में दिलचस्प और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. राजस्थान चुनाव के सियासी पंडित अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार मान रहे हैं. गहलोत को कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जाता है. वो इस वक्त कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव हैं. छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहने वाले गहलोत ने सबसे पहले 1980 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतकर राजनीति में प्रवेश किया था. इसके बाद उन्होंने 1984, 1991, 1996 और 1998 में भी लोकसभा चुनाव जीता. साल 1999 में उन्हें राजस्थान के चुनाव में एंट्री की और सरदारपुरा, जोधपुर से चुनाव जीतकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे. वो 1998 से लेकर 2003 और 2008 से लेकर 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे.

 

 

केकड़ी : राजस्थान के अजमेर जिले की केकड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी की ओर से डॉ रघु शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं. खास बात ये है कि रघु शर्मा अजमेर के सांसद भी हैं. लेकिन उससे भी खास बात ये है कि अशोक गहलोत ने एक बयान में उन्हें सीएम उम्मीदवार तक कह दिया है. इसके बाद से ही केकड़ी सीट चर्चा में है. बीजेपी ने रघु शर्मा के खिलाफ मौजूदा एमएलए का टिकट काटकर मौजूदा पार्षद राजेन्द्र विनायका को चुनावी मैदान में उतारा है.

 

 

बाड़मेर : बीजेपी सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी बाड़मेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कर्नल सोनाराम चौधरी की गिनती मारवाड़ के कद्दावर जाट नेताओं के रूप में होती है. कांग्रेस की तरफ से मेवाराम जैन वहां से चुनाव लड़ रहे हैं. मेवाराम वर्तमान में बाड़मेर सीट से विधायक भी हैं. सोनाराम चौधरी 1996, 1998, 1999 में बाड़मेर लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर संसद पहुंचे. इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनावों में चौधरी पूर्व केन्द्री य मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्रव सिंह के सामने चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. सोनाराम 2008 में बाड़मेर की बायतु विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे. इसके बाद 2013 में चौधरी ने इसी सीट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 2013 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद चौधरी 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता और केन्द्री य मंत्री जसवंत सिंह को हराकर लोकसभा पहुंचे. बीजेपी ने 2018 के विधानसभा चुनावों में सांसद सोनाराम चौधरी को इस बार बाड़मेर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है.

 

 

नाथद्वारा : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी राजस्थान विधानसभा चुनाव में नाथद्वारा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके खिलाफ वसुधंरा सरकार में मंत्री किरण माहेश्वरी चुनावी मैदान में हैं. यहां दोनों ही बड़े चेहरों के लिए जीत हासिल करना प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है. सीपी जोशी का पूरा नाम चंद्रप्रकाश जोशी है. वो राजस्थान की नाथद्वारा विधानसभा सीट से 1980, 1985, 1998 और 2003 चुनाव जीते हैं. इसके अलावा उन्होंने पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली थी. 2014 में वो जयपुर ग्रामीण से लोकसभा का चुनाव हार गए थे.

 




V.K Sharma
Editor in Chief
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