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अध्यात्म
By   V.K Sharma 13/11/2018 :12:41
Chhath Puja 2018: दिल्ली में छठ के अवसर पर 13 नवंबर को बंद रहेंगे स्कूल , जानिए छठ पूजा की विधि, सामग्री, खास हैं ये लोक गीत बताते हैं पर्व का महत्व और अर्थ !
 











 

 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : देश ही नहीं दुनिया भर में जहां-जहां बिहार और पूर्वांचल के लोग रह रहे हैं वहां छठ पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह व्रत बेहद पवित्रता के साथ किया जाता है। इस व्रत को करने में कई तरह नियम कायदों को बेहद सावधानी से पालन किया जाता है। 4 दिनों तक चलने वाला यह व्रत 11 नवंबर को नहाय खाय से शुरू हुआ और 14 नवंबर को उगते हुए सूर्य अर्घ्य तक चलेगा। . कार्तिक की षष्ठी छठ पूजा की जाती है. यह त्योहार दिवाली के 6 दिन बाद आता है, इसलिए इसे छठ पूजन कहा जाता है. इन चार दिनों में सूर्य देव और छठ मैया की अराधाना की जाती है. वहीं काफी लोग छठ का व्रत भी करते हैं. छठ पूजा (Chhath Puja) के अवसर पर 13 नवंबर को दिल्ली के सभी स्कूल बंद रहेंगे. आस्था का महापर्व छठ इस साल 11 नवंबर को शुरू हुआ और 14 नवंबर को खत्म होगा. इस साल छठ पूजा (Chhath Puja 2018) में सूर्य को पहला अर्घ्य 13 नवंबर को दिया जा रहा है. दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक दिल्ली के पब्लिक और प्राइवेट स्कूल 13 नवंबर को बंद रहेंगे. बता दें कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री ने लेफ्टिनेंट गवर्नर के समक्ष 13 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव रखा था. आपको बता दें कि छठी मइया (Chhathi Maiya) के इस पर्व को बिहार में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल में भी छठी मइया को पूजा जाता है. छठ पूजा के दिन घर के लगभग सभी सदस्य (बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर) व्रत रखते हैं. भोजपुरी (Bhojpuri Songs) के प्रसिद्ध छठ मइया के गीत सुने जाते हैं. टिप्पणियां मान्यता है कि छठ का व्रत (Chhath Vrat) रखने से संतान की प्राप्ति होती है और बच्चों से जुड़े कष्टों का निवारण होता है. माना जाता है कि छठी मइया का व्रत (Chhathi Maiya Vrat) रखने से सूर्य भगवान (Surya Bhagwan) की कृपा बरसती है. छठ पूजा के दौरान लोग उपवास रखकर छठ देवी की पूजा करते हैं और कमर तक पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते है। छठ पूजा का पर्व लोग भगवान सूर्य से अपने परिवार की सफलता और खुशियों की कामना करने के लिए करते है। कहीं-कहीं इस त्योपहार को छठ पूजा, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी से भी जाना जाता है। नहाय-खाय से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। वहीं इसे सेहत से भी जोड़ा गया है। छठ का व्रत काफी कठिन होता है इसलिए इसे महाव्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन छठी देवी की पूजा की जाती है। छठ देवी सूर्य की बहन हैं लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। छठ माता संतान प्रदान करती हैं। इस पर्व से योग्य संतान पैदा होती है। चलिए सुजीत जी महाराज से जानते हैं छठ पूजा में नहाय खाये, खरना, पहला संध्या अर्घ्य और दूसरा उषा अर्घ्य का क्याज अर्थ होता है। 

छठ पूजा की सामग्री (Chhath Puja Samagri)

पहनने के लिए नए कपड़े, दो से तीन बड़ी बांस से टोकरी, सूप, पानी वाला नारियल, गन्ना, लोटा, लाल सिंदूर, धूप, बड़ा दीपक, चावल, थाली, दूध, गिलास, अदरक और कच्ची हल्दी, केला, सेब, सिंघाड़ा, नाशपाती, मूली, आम के पत्ते, शकरगंदी, सुथनी, मीठा नींबू (टाब), मिठाई, शहद, पान, सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम और चंदन. 

छठी मइया का प्रसाद (Chhathi Maiya Ka Prasad)

ठेकुआ, मालपुआ, खीर, खजूर, चावल का लड्डू और सूजी का हलवा आदि छठ मइया को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है.

छठी मइया की पूजा विधि (Chhath Puja Vidhi)

- नहाय-खाय के दिन सभी व्रती सिर्फ शुद्ध आहार का सेवन करें.

- खरना या लोहंडा के दिन शाम के समय गुड़ की खीर और पूरी बनाकर छठी माता को भोग लगाएं. सबसे पहले इस खीर को व्रती खुद खाएं बाद में परिवार और ब्राह्मणों को दें.

- छठ के दिन घर में बने हुए पकवानों को बड़ी टोकरी में भरें और घाट पर जाएं.

- घाट पर ईख का घर बनाकर बड़ा दीपक जलाएं.

- व्रती घाट में स्नान कर के लिए उतरें और दोनों हाथों में डाल को लेकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें.

- सूर्यास्त के बाद घर जाकर परिवार के साथ रात को सूर्य देवता का ध्यान और जागरण करें. इस जागरण में छठी मइया के  गीतों (Chhathi Maiya Geet) को सुनें.

- सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सारे व्रती घाट पर पहुंचे. इस दौरान वो पकवानों की टोकरियों, नारियल और फलों को साथ रखें.

- सभी व्रती उगते सूरज को डाल पकड़कर अर्घ्य दें.

- छठी की कथा सुनें और प्रसाद का वितरण करें.

- आखिर में सारे व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें.

 

छठ पूजा के दौरान व्रतियों के लिए नियम (Chhath Puja Vrat Niyam)

1. व्रती छठ पर्व के चारों दिन नए कपड़े पहनें. महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनें.

2. छठ पूजा के चारों दिन व्रती जमीन पर चटाई पर सोएं.

3. व्रती और घर के सदस्य भी छठ पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांस-मछली ना खाएं.

4. पूजा के लिए बांस से बने सूप और टोकरी का इस्तेमाल करें.

5. छठ पूजा में गुड़ और गेंहू के आटे के ठेकुआ, फलों में केला और गन्ना ध्यान से रखें.

 

छठ मइया का पूजा मंत्र (Chhath Puja Mantra)

ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं |

अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् ||

 

छठी मइया की कथा (Chhathi Maiya Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम का एक राजा था. उनकी पत्नी का नाम था मालिनी. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और रानी दोनों की दुखी रहते थे. संतान प्राप्ति के लिए राजा ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. यह यज्ञ सफल हुआ और रानी गर्भवती हुईं.

 

लेकिन रानी की मरा हुआ बेटा पैदा हुआ. इस बात से राजा और रानी दोनों बहुत दुखी हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति की आशा छोड़ दी. राजा प्रियव्रत इतने दुखी हुए कि उन्होंने आत्म हत्या का मन बना लिया, जैसे ही वो खुद को मारने के लिए आगे बड़े षष्ठी देवी प्रकट हुईं.

 

षष्ठी देवी ने राजा से कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी सच्चे मन से पूजा करता है मैं उन्हें पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. यदि तुम भी मेरी पूजा करोगे तो तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी. राजा प्रियव्रत ने देवी की बात मानी और कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की. इस पूजा से देवी खुश हुईं और तब से हर साल इस तिथि को छठ पर्व मनाया जाने लगा. छठी मइया के गीत (Chhathi Maiya Geet) : वेसे तो भारतीय उत्सवों और  पर्वों से कर्इ लोक गीत और  कलायें जुड़ी हैं, जैसे दक्षिण में ओणम और  पोंगल पर रंगोली बनार्इ जाती है और  महाराष्ट्र में विभिन्न अवसरों पर कुछ खास लोक नृत्य किए जाते हैं। अन्य राज्यों में भी कर्इ लोक कलाओ का त्यौहारों से जुड़ा है। इसी तरह बिहार के इस प्रमुख पर्व छठ पूजा से भी कर्इ सुंदर लोकगीतों को गाया जाता है। लोकपर्व छठ के दौरान कर्इ कार्य जैसे प्रसाद बनाते, खरना के समय, अर्घ्य देने के लिए जाते हुए, अर्घ्य दान के समय और घाट से घर लौटते हुए अनेक मधुर और भक्तिपूर्ण लोकगीत गाये जाते हैं। हम यहां ऐसे ही कुछ गीत लेकर आये हैं।

 

1.    'केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय,कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए',सेविले चरन तोहार हे छठी मइया। महिमा तोहर अपार।,उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर।,निंदिया के मातल सुरुज अंखियो न खोले हे।, चार कोना के पोखरवा,हम करेली छठ बरतिया से उनखे लागी।,केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेड़राय।,उ जे खबरी जनइबो अदिक (सूरज) से सुगा देले जुठियाए,उ जे मरबो रे सुगवा धनुक से सुगा गिरे मुरछाये,उ जे सुगनी जे रोये ले वियोग से आदित होइ ना सहाय देव होइ ना सहाय |

अर्थ :- इस गीत में एक ऐसे तोते का जिक्र है जो केले के एक गुच्छे के पास मंडरा रहा है आैर उसको डराया जाता है कि अगर तुम इस पर चोंच मारोगे तो तुम्हारी शिकायत भगवान सूर्य से कर दी जाएगी जो तुम्हें नहीं माफ करेंगे, फिर भी तोता केले को जूठा कर देता है और सूर्य के कोप का भागी बनता है। अब उसकी पत्नीसुगनी क्या करे बेचारी? कैसे सहे इस वियोग को? क्योंकि अब तो सूर्यदेव भी उसकी कोई सहायता नहीं कर सकते, आखिर तोते ने पूजा की पवित्रता जो नष्ट की है। अगला गीत भी इसी कथा का विस्तार है।

 

2.    कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति जाए... बहंगी लचकति जाए... बात जे पुछेले बटोहिया बेहंगी केकरा के जाए? बहंगी केकरा के जाए? तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहंगी छठी माई के जाए... बहंगी छठी माई के जाए... कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति जाए... बहंगी लचकति जाए...

अर्थ :- केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेंड़राय... ओह पर सुगा मेंड़राय... खबरी जनइबो अदित से सुगा देले जूठियाय सुगा देले जूठियाय... ऊ जे मरबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरछाय... सुगा गिरे मुरछाय... केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मेंड़राय... ओह पर सुगा मेंड़राय...

 

3.    पटना के घाट पर नारियर नारियर किनबे जरूर... नारियर किनबो जरूर... हाजीपुर से केरवा मंगाई के अरघ देबे जरूर... अरघ देबे जरुर... आदित मनायेब छठ परबिया वर मंगबे जरूर... वर मंगबे जरूर... पटना के घाट पर नारियर नारियर किनबे जरूर... नारियर किनबो जरूर... पांच पुतर, अन, धन, लछमी, लछमी मंगबे जरूर... लछमी मंगबे जरूर... पान, सुपारी, कचवनिया छठ पूजबे जरूर... छठ पूजबे जरूर... हियरा के करबो रे कंचन वर मंगबे जरूर... वर मंगबे जरूर... पांच पुतर, अन, धन, लछमी, लछमी मंगबे जरूर... लछमी मंगबे जरूर... पुआ पकवान कचवनिया सूपवा भरबे जरूर... सूपवा भरबे जरूर... फल-फूल भरबे दउरिया सेनूरा टिकबे जरूर... सेनूरा टिकबे जरुर... उहवें जे बाड़ी छठी मईया आदित रिझबे जरूर... आदित रिझबे जरूर... कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति जाए... बहंगी लचकति जाए... बात जे पुछेले बटोहिया बहंगी केकरा के जाए? बहंगी केकरा के जाए? तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहंगी छठी माई के जाए... बहंगी छठी माई के जाए..

अर्थ :- इस गीत में छठ माता से धन, संतान और सुहाग से जुड़े वरदान मांगने की बात कही गर्इ है, जिसमें पूजा करने वाले कह रहे हैं कि वे पूरे विधि विधान से पूजा जरूर करेंगे और ऐसा  करके छठ मां से इन चीजों का वरदान मांगेगे।

 

V.K Sharma
Editor in Chief
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