444 साल बाद फिर से इलाहाबाद जाना जायेगा अपने पुराने नाम प्रयागराज से , योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी !
लखनऊ (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : इलाहाबाद का नाम 444 साल बाद बदल के फिर से प्रयागराज हो गया । मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ के मुताबिक राज्यपाल ने भी इस पर अपनी सहमति दी है। घोषणा से संत समाज
उत्साहित है। दरअसल पुराणों में इसका नाम प्रयागराज ही था। अकबर के शासनकाल में
इसे इलाहाबाद कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर
प्रयागराज करने के एक प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। आज कैबिनेट की बैठक के
बाद मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, 'इलाहबाद आज से प्रयागराज के नाम से जाना जायेगा ।' बता दें कि कांग्रेस ने इहालाबाद का नाम बदलने का विरोध
किया है। स्थानीय लोग और संत समुदाय लंबे समय से इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज
करने की मांग कर रहा था। योगी सरकार ने भी कुछ दिनों पहले कहा कि वह इस शहर का नाम
बदलकर प्रयागराज करने के बारे में विचार कर रही है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने
शनिवार को कहा था कि 2019 में आयोजित होने वाले
कुंभ मेला से पहले शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने का एक प्रस्ताव है। इसके पहले
समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने
इलाहाबाद का नाम बदलने पर योगी सरकार के
प्रयास की आलोचना की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार केवल 'नाम बदलकर' अपने कार्यों का ढिंढोरा
पीटना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में संपन्न
हुई कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्तावों को मंजूरी
मिली। जिसमें पहला इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी
शामिल है। सात मेडिकल कॉलेजों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा ललितपुर
में पाली तहसील के 23 गांव को सदर तहसील में
शामिल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। दुग्ध उत्पादन प्रोत्साहन को भी
सरकार ने मंजूरी दी और नंद बाबा प्रोत्साहन पुरस्कार अवार्ड शुरू किया है। जिसका
लाभ ब्लॉक स्तर के दुग्ध उत्पादक को भी मिलेगा। सरकार में सबसे महत्वपूर्ण फैसला
नई खांडसारी नीति को मंजूरी देकर किया है। इसमें पहले एक चीनी मिल से 15 किलोमीटर की दूरी के भीतर खांडसारी उद्योग नहीं लगाया जा
सकता था लेकिन अब उस की दूरी घटाकर 7:30 किलोमीटर कर दी गई है।
इससे गन्ना किसानों को सहूलियत मिलेगी।गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर मे योगी
सरकार ने मुगलशराय रेलेव स्टेशन का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) स्टेशन
कर दिया। योगी सरकार के इस पहल का भी विपक्ष ने विरोध किया था। मुख्यमंत्री ने
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने को समर्थन देते हुए कहा कि जहां दो नदियों का
संगम होता है उसे प्रयाग कहा जाता है। उत्तराखंड में भी ऐसे कर्णप्रयाग और
रुद्रप्रयाग स्थित है। हिमालय से निकलने वाली देवतुल्य दो नदियों का संगम इलाहाबाद
में होता है और यह तीर्थों का राजा है। ऐसे में इलाहाबाद का नाम प्रयाग राज किया
जाना उचित ही होगा।कुंभ मेले की तैयारियों पर जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने
बताया कि करीब 3200
हेक्टेयर में आयोजित होने
वाले मेले में स्वच्छता पर खास ध्यान रखा जाएगा। मेले में 1,22,000 शौचालय और 20,000 कूड़ेदान बनेंगे। इसके साथ ही 11,400 सफाई कर्मी तैनात किए जाएंगे। मेले में पहली बार विदेशी
मुद्रा विनियम के लिए तीन सेंटर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही 4 बैंक शाखाएं , 20 एटीएम और 34 मोबाइल टावर भी लगेंगे।सीएम ने बताया कि कुंभ के दौरान लोग पहली बार किले के अंदर मौजूद अक्षय वट
और सरस्वती के दर्शन भी कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि 48 दिन तक चलने वाले इस आयोजन से जुड़ी 445 परियोजनाओं में से 92 पूर्ण कर ली गई हैं। वहीं, 88 परियोजनाएं 15 अक्टूबर तक पूरी होंगी
जबकि 250 परियोजनाओं को 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसी तरह 52 अन्य परियोजनाएं 15 नवंबर तक पूरी होंगी जबकि अस्थाई प्रकृति की 161 परियोजनाएं दिसंबर तक पूरी की जाएंगी। मुख्यमंत्री
आदित्यनाथ योगी ने बताया की पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए वर्षों से
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की मांग उठती आ रही थी। मगर किभी इस पर गंभीरता से
विचार नहीं किया गया। जब मार्च 2017 को योगी सरकार उत्तर
प्रदेश में आई तो उन्होंने यह वादा भी किया कि वे इलाहाबाद प्रयागराज कर देंगे।
इसके बाद कई संतों ने उन्हें उनके वादे को याद दियाला। इलाहाबाद में मुख्यमंत्री
ने इस घोषणा को अमली जामा पहनाने की शुरुआत कर दी।रामचरित मानस में इसे प्रयागराज
ही कहा गया है। इलाहाबाद। संगम के जल से प्राचीन काल में राजाओं का अभिषेक होता
था। इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है। वन जाते समय श्रीराम प्रयाग में
भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे। भगवान श्रीराम जब श्रृंग्वेरपुर पहुंचे
तो वहां प्रयागराज का ही जिक्र आया। सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य
पुराण के 102 अध्याय से लेकर 107 अध्याय तक में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है। उसमें
लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं। अकबरनामा
और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन
1574 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी। उसने यहां नया
नगर बसाया जिसका नाम उसने इलाहाबाद रखा। उसके पहले तक इसे प्रयागराज के ही नाम से
जाना जाता था।प्रयाग पौराणिक नाम है जो
कि यज्ञ और तपस्या की भूमि है। यदि किसी शासक ने इसका नाम बदलकर अपनी रुचि के
अनुसार इलाहाबाद रख दिया तो उससे इतिहास नहीं बदल गया। संत मुख्यमंत्री ने भारतीय
संस्कृति को पुनर्जागृत कर दिया। यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था।