2019 में बीजेपी की ये है चुनावी रणनीति ,यूपी में बीजेपी ने बनाया 'विलेज प्लान', क्या बुआ – भतीजा मिलकर ढूंढ पाएंगे इसकी काट !
लखनऊ (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : अगले पांच महीनों तक यूपी
से आने वाले बीजेपी के 400 से ज्यादा विधायक और सांसद अपने राज्य में एक ग्रामीण
अभियान पर निकलेंगे। इस अभियान का मकसद 2019 के लोकसभा चुनाव में संभावित
एसपी-बीएसपी गठबंधन को कमजोर करना है। एक बीजेपी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर
बताया कि पार्टी ने राज्य के अपने सभी विधायकों, सांसदों और एमएलसी से कहा
है कि वे एससी और ओबीसी समुदाय से आने वाले कम से कम 10 वोटरों को पार्टी में
शामिल होने के लिए प्रेरित करें। बीजेपी के संगठन सचिव सुनील बंसल से जब इस बारे
में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पार्टी मुख्यालय पर एक मॉनिटरिंग सेल बनाया गया
है। बीजेपी नेताओं ने बताया कि 1 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान के लिए शीर्ष
नेताओं ने जो निर्देश दिया है, उसके मुताबिक पार्टी में
शामिल होने वाले कार्यकर्ता एक ही पार्टी के नहीं होने चाहिए। साथ ही, वे किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ जुड़े होने चाहिए, खासकर बीएसपी के साथ। कार्यकर्ता ने बताया कि इस अभियान पर
लखनऊ स्थित बीजेपी के राज्य मुख्यालय में बने वॉर रूम से नजर रखी जाएगी।साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते
हुए सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से तैयारियों में जुट गई है.
सत्ताधारी बीजेपी साल 2014 के मुकाबले ज्यादा बड़ी जीत दर्ज करने के इरादे से अभी
से जी जान से जुट गई है. बीजेपी ने यूपी में किसानो की समस्याओ का समाधान करते हुए
किसानो एवम माध्यम वर्ग के लोगो के आर्थिक हितो का ध्यान करते हुए कुछ नए प्लान
बनाये है बीजेपी का खास फोकस सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश
पर है. पिछले चुनाव में बीजेपी ने सहयोगियों के साथ मिलकर यूपी 73 लोकसभा सीटें
जीती थी. इस वजह से उसे बहुमत के जादूई आंकड़े तक पहुंचने में आसानी हुई थी. ऐसे
ही रिजल्ट को दोहराने के लिए बीजेपी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. इस बार
संभावना है कि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी मिलकर बीजेपी का मुकाबला
करेंगे. इस चुनौती से पार पाने के लिए बीजेपी ने अलग-अलग तरह के प्लान बनाकर उसे
कारगर बनाने में जुटी है. इसी कड़ी में बीजेपी ने यूपी में 'प्लान विलेज' बनाया है. दरअसल, बीजेपी को शहरी लोगों की पार्टी कहा जाता है. 2014 के
लोकसभा और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न के आधार पर कह
सकते हैं कि बीजेपी को गांवों से भी वोट मिलने लगे हैं. गांव में बनी इसी पकड़ को
बनाए रखने के लिए बीजेपी 'प्लान विलेज' लेकर आई है. बीजेपी में संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है
कि अखिलेश यादव और मायावती का पारंपरिक वोटर गांवों में बसता है. इस मोर्चे पर
उनका मुकाबला करने के लिए बीजेपी को गांवों पर फोकस करना पड़ रहा है. 2019 के किले
को फतह करने के लिए बीजेपी ने बनाया गांव मजबूत करने का प्लान बनाया है. यूपी में
विधानसभा सत्र खत्म होने के बाद इन बिंदुओं पर पार्टी जल्द काम शुरू करेगी. इस
प्लान के तहत 5 हज़ार नेता 45 हजार ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपाल लगाएंगे. ये
चौपाल 3-3 दिनों के क्रम में लगेंगी. यानि एक राउंड में 15 हज़ार ग्राम चौपाल
लगेंगी. यह कार्यक्रम 9 दिन में पूरा होगा. हर बूथ पर नई कमेटी का गठन होगा. कई
बूथों का नए सिरे से गठन होगा. बूथ कमेटियों पर जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा.
पार्टी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि बीजेपी के सारे विधायक गांवों के दौरे
पर जाएं. एक दिन में विधायक कम से कम 5 गांव के दौरा करें. अपनी विधानसभा क्षेत्र
के सभी गांव में पहुंचना विधायकों को ज़रूरी होगा. मालूम हो कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया इंटरव्यू में कहा था कि वे 2014 की अपेक्षा ज्यादा
विश्वास के साथ सत्ता में आएंगे. पीएम मोदी के इस बयान को सफल बनाने के लिए पार्टी
के कार्यकर्ता अभी से जुट गए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद मान
चुके हैं कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश है. बीएसपी, एसपी, कांग्रेस, आरएलडी के एक मंच पर आने की संभावना के चलते विपक्षी खेमा
मजबूत नजर आ रहा है. विपक्षी एकता को मात देने के लिए बीजेपी लगातार प्रयास में
जुटी है. अमित शाह कह रहे हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों ने इतना काम किया है कि
यूपी की जनता एक बार फिर से बीजेपी पर भरोसा जताएगी. उन्होंने विपक्षी एकता को
परिस्थिति और निजी स्वार्थ के लिए बनाया गया गठबंधन करार दिया है. बीजेपी के एक
सूत्र ने बताया, 'एससी और ओबीसी समुदायों
को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए सांसदों, विधायकों और एमएलसी को
दिए गए कार्यों पर नजर रखने के लिए हमारा सिस्टम पूरी तरह तैयार है। ये सभी हर
महीने में कम से कम 10 दिन गांवों में बिताएंगे, ताकि वे कम से कम 50
गांवों तक जा सकें। एक विधानसभा में 250 के करीब गांव होते हैं। ऐसे में हम जनवरी
2019 से पहले सभी विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे।' सूत्र ने बताया कि पार्टी ने अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को 'ब्रज, काशी, पश्चिम, गोरखपुर, अवध और कानपुर' इलाके के गांवों में जा
रहे नेताओं के बारे में नियमित रिपोर्ट भेजने का काम सौंपा है।इसके अलावा पार्टी की राज्य इकाई ने एससी
समुदाय से आने वाले पूर्व डीजीपी बृजलाल, राज्यसभा सांसद राम सकल
और कांता कर्दम जैसे नेताओं को नियमित अंतराल पर ग्रामीण इलाकों में अपने समुदाय
के साथ बैठक करने को कहा है।बीजेपी के एक
दूसरे सूत्र ने बताया, 'इन नेताओं को किन ग्रामीण
इलाकों में बैठक करना है, यह पार्टी तय करेगी।
हमारे पास यूपी के सभी इलाकों का जातिवार आंकड़ा है। हमारे पास एससी समुदाय के
अच्छे नेता हैं, जो बीएसपी को जमीनी स्तर
पर चुनौती देंगे।' बीजेपी पहले ही
को-ऑपरेटिव संस्थाओं पर अपनी पकड़ मजबूत कर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी
समाजवादी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर चुकी है। इन कोऑपरेटिव संस्थाओं में
प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसायटी भी शामिल है, जिसे एसपी की राजनीतिक
ताकत का मुख्य स्रोत माना जाता था। सूत्र ने बताया, 'इस समय को-ऑपरेटिव
संस्थाओं में विभिन्न पदों पर करीब 6 हजार से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ता हैं।'