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अध्यात्म
By   V.K Sharma 05/12/2018 :16:36
भस्मासुर से बचने के लिए इस गुफा में छुपे थे भगवान शिव !
 





 

 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : कैमूर पहाड़ी स्थित गुप्ता धाम की ख्याति शैव केन्द्र के रूप में है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भस्मासुर से भयभीत होकर भगवान शिव को भागना पड़ा था। वह इसी धाम की  गुफा में आकर छुपे थे। भगवान विष्णु ने पार्वती का रूप धारण करके भस्मासुर को अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य करने का प्रस्ताव रखा। देवी पार्वती से शादी करने के लोभ में भस्मासुर ने जब अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य शुरू किया, तो भगवान शिव से प्राप्त किए गए वरदान के कारण वह जलकर भस्म हो गया।  श्रीमद्भागवत के वृकासुर की कथा के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करके यह वरदान मांग लिया कि मैं जिसके सिर पर हाथ रख दूं, वह जलकर भस्म हो जाए। वह देवी पार्वती से ब्याह रचाने के लिए भगवान शिव के  सिर पर हाथ रखने का प्रयास किया, तो शिवजी को भागना पड़ा। वह भागते हुए कैमूर पहाड़ी की इसी गुफा में आकर छुप गए। गुप्ता धाम में नाच घर भी है, जहां भस्मासुर ने नृत्य किया था। लेकिन, रोशनी का समुचित प्रबंध नहीं होने के कारण श्रद्धालु नाच घर को नहीं देख पाते हैं। हालांकि गुप्ता धाम एक प्राकृतिक गुफा है। गुफा में अवस्थित शिवलिंग  वास्तव में प्राकृतिक शिवलिंग है।  शिव लिंग पर गुफा की छत से बराबर पानी टपकता रहता है। इस कारण यह सैकड़ों साल से लोगों की  आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि भस्मासुर मां पार्वती के सौंदर्य पर मोहित होकर शिव से मिले वरदान की परीक्षा लेने के लिए उन्हीं के सिर पर हाथ रखने के लिए दौड़ा। वहां से भागकर भोलेनाथ  यहां की गुफा के गुप्त स्थान में छुपे थे।  पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र गुफा का द्वार 18 फीट चौड़ा और 12 फीट ऊंचा मेहराबनुमा है। गुफा में लगभग 363 फीट अंदर जाने पर बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसमें सालभर पानी रहता है। श्रद्धालु इसे पातालगंगाकहते हैं। गुफा के अंदर प्राचीन काल के दुर्लभ शैलचित्र आज भी मौजूद हैं।  वहीं स्थानीय लोग और श्रद्धालुओं की माने तो रास्ते में पड़ने वाली नदी पर चचरा का पुल बनाया गया था। लेकिन पानी का फ्लो तेज होते ही टूट गया। ऐसे में अब श्रद्धालु राज्य सरकार से इस नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। ताकि दर्शनार्थियों को यहां पहुंचने में किसी भी तरह की परेशानी ना हो।  वहीं अगर हम यहां तक पहुचने के लिए रास्ते की बात करें तो रास्ता पथरीले पहाड़ से होकर गुजरता है। जिससे यहां आने में पर्यटकों को काफी दिक्कत होती है। दर्शनार्थी और साधू सरकार से एक रास्ते की आस में हैं ताकि यह राहें थोड़ी आसान हो जाएं।रोहतास के इतिहासकार डॉ. श्याम सुन्दर तिवारी बताते हैं कि कैमूर पहाड़ी में चूना पत्थर का आधिक्य है। इस कारण गुफा की ऊपरी छत से बूंद-बूंद पानी के साथ हजारों सालों से  गिर रहे चूने के निक्षेप से यह शिवलिंग बना है।  ऊपर से पानी के साथ चूना गिरने के कारण आरोही निक्षेप भी हो गया है, जो ऊपर से नीचे की ओर लटक रहा है। इसे भक्तगण जटा कहते हैं। गुप्ता धाम कैमूर पहाड़ी में एक घाटी के पूर्वी भाग में सासाराम से 12 मील दक्षिण तथा शेरगढ़ किला से लगभग 8 मील दक्षिण-पूरब में थोड़ी ऊंचाई पर है। गुफा में  पूर्ण अंधेरा व सीलन तथा  कीचड़ युक्त मार्ग  कुछ सालों से पूरी गुफा की फ़र्श का पक्कीकरण कर दिया गया है।  गुफा में आगे जाने पर एक खड्ड मिलता है, जिसे पाताल गंगा कहा जाता है। इसी गुफा के बीच से एक अन्य गुफा शाखा के रूप में फूटती है, जो आगे एक कक्ष का रूप धारण करती है। इसी कक्ष को लोग नाच घर या घुड़दौड़ कहते हैं। यहां से पश्चिम जाने पर एक अन्य संकरी शाखा दाहिनी ओर जाती है। इसके आगे के भाग को तुलसी चौरा कहा जाता है। इस मिलन स्थल से एक और गुफा थोड़ी दूर दक्षिण होकर पश्चिम चली जाती है। इसी में गुप्तेश्वर महादेव नामक शिवलिंग है। यहां से लगभग डेढ़ किमी दक्षिण में सीता कुंड है, जिसका जल बराबर ठंडा रहता है। यहां स्नान करने का अद्भुत आनंद है।  गुप्ता धाम के रास्ते में शेरगढ़ किला और दुर्गावती जलाशय भी पड़ता है। इस प्रकार यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। गुप्ता धाम में महाशिवरात्रि और वसंत पंचमी पर विशाल मेला लगता है। पूरे श्रावण मास में रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालुजन जलाभिषेक करने आते हैं। र शिवरात्रि के दिन गुप्ता धाम में करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं।  भुरकुड़ा के कामेश्वर सिंह खरवार कहते हैं पहले भक्त दुर्गावती नदी के तट से वाहनों से भी धाम पर पहुंच जाते थे, किन्तु दुर्गावती जलाशय बन जाने से वह रास्ता बंद हो गया । अब पनारी व उगहनी घाटों के अलावे ताराचंडी के रास्ते से भक्त पैदल ही कठिन पहाड़ी चढ़ाई करके कष्ट झेलते हुए धाम तक पहुंचते हैं।  सड़क का अभाव है। इसके अलावा धाम पर पेयजल, रोशनी, चिकित्सा सहित अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। धाम की एक प्रबंध समिति अपने बूते पर रोशनी व गुफा में ऑक्सीजन गैस की व्यवस्था करती है।  गुप्ता धाम का शिवलिंग कई मायने में अन्य शिवलिंगों में अलग है। श्रद्धालु मन्नत पूरा होने पर गुप्ता धाम में पीपल के पेड़ में घंटा टांगते हैं। यह परम्परा वर्षो से चली आ रही है। प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु घंटा टांगते हैं। आज  स्थिति यह है कि पूरा धाम परिसर घंटा से पटा पड़ा है। धाम में श्रद्धालु पांच सौ ग्राम से लेकर पचास किलो ग्राम तक का घंटा बांधते हैं।  गुप्ता धाम के पुजारी समहुतिया बाबा कहते है कि आज धाम पर चालीस से पचास क्विंटल घंटा रखा हुआ है। जो घंटा टूटकर गिर जाता है, उसे हमलोग एक कमरे में रख देते हैं।

 



V.K Sharma
Editor in Chief
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