जन्माष्टमी के पर्व पर श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ खास बातें , जानिए पूजा करने की विधि और उचित समय !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष की
अष्टमी तिथि पर बुधवार और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। इस दिन विधि-विधान
से श्रीकृष्ण की पूजा करने से सभी संकटों का
निवारण होता है और हर इच्छा पूरी होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार,भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करने के कुछ तरीके और नियम
बताए गए हैं। इसके साथ कुछ अन्य जरूरी बातें भी बताई गई हैं। जिनमें बताया गया है
कि जन्माष्टमी व्रत कैसे किया जाए। इस वर्ष जन्माष्टमी भारतीय समयानुसार रविवार
रात्रि को 08 बजकर 49 मिनट से लेकर अगले दिन सोमवार शाम 07 बजकर 23 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। रविवार को ही रोहिणी नक्षत्र
रात्रि 08 बजकर 49 मिनट से लेकर सोमवार को रात्रि 08 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान उन्हें
धनिए की पंजीरी का भोग लगाएं. कारण, रात्रि में त्रितत्व वात
पित्त और कफ में वात और कफ के दोषों से बचने के लिए धनिए की पंजीरी का प्रसाद
बनाकर ही भगवान श्रीकृष्ण को चढ़ाएं. धनिए के सेवन से वृत संकल्प भी सुरक्षित रहता
है. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अत्यंत कठिनाई में मातुल कंस की जेल में हुआ. पिता
वसुदेव ने उफनती यमुना को पार कर रात्रि में ही उन्हें वृंदावन में यशोदा-नन्द के
घर छोड़ा. यशोदानंदन को खोजने और मारने कंस ने कई राक्षस-राक्षनियों को वृंदावन
भेजा. नन्हे बालगोपाल ने स्वयं को इनसे बचाया. इंद्र के प्रकोप और घनघोर बारिश से वृंदावनवासियों
को बचाने गोवर्धन पर्वत उठाया. मनमोहन ने गोपिकाओं से माखन लूटा. गाएं चराईं.
मित्र मंडली के साथ खेल खेल में कालियादह का मानमर्दन किया. बृजधामलली राधा और
अन्य गोपियों के साथ रास किया. कंस वध किया. बालमित्र सुदामा से द्वारकाधीश होकर
भी दोस्ती को अविस्मृत रखा. द्रोपदी का चीरहरण निष्प्रभावी किया. धर्मपालक पांडवों
की हर परिस्थिति में रक्षा की. अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया.
द्वारकापुरी की स्थापना की. ऐसी मान्यिता है किसी मौके पर यादी कान्हा को कुछ खास
चीजें अर्पिकत की जाएं तो बाल गोपाल जल्दीा ही प्रसन्ने होते हैं और मनचाहा वरदान
देते हैं. कृष्णे के जन्मि का उत्संव
मनाया जाएगा. आधी रात पूजन का समय आने में अभी कई घंटे बाकी हैं. ऐसे में यदि आप चाहते भगवान श्रीकृष्णा को प्रसन्नआ करना
चाहते हैं तो इन चीजों की तैयारी पहले से कर लें. इसका चढ़ावा चढ़ाएं.
1. चांदी की बांसुरी : अगर आप अक्सोर आर्थिनक रूप से परेशान
रहते हैं तो जन्माष्टमीके दिनभगवान कृष्णद को चांदी की बांसुरी जरूर चढ़ाएं.
बाल गोपाल की यह बांसुरी पूजन में चढ़ाने के बाद अपने पर्स में रख लें. ऐसा कहा
जाता है की ऐसे व्यक्तियो को कभी पैसे की कमी नहीं होती.
2. माखन-मिश्री : कान्हा को माखन चोर भी कहा जाता है. बचपन में
कन्हैहया ने खूब माखन खाए हैं. उन्हेंर माखन बहुत प्रिय है. इसलिए कान्हा को खुश
करना है तो उन्होंने माखन का भोग जरूर लगाएं. अगर घर में छोटे बच्चेब हैं तो उनको
भी आज माखन चटाएं.
3. झूला : श्री कृष्णको झूला भी बहुत पसंद है. आज के दिन कृष्णै को झूला चढ़ाएं और बाल गोपाल
को झूले पर बैठाकरउन्हेंझुलाएं.
4. राखी : इस दिनभगवान श्री कृष्णु को राखी बांधने की भी प्रथा है. कहा जाता है कीभगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों को रक्षा का
वरदान देते हैं.
5. तुलसी : श्री कृष्णं की पूजा में तुलसी का इस्तेनमाल जरूर
होता है. तुलसी के बिनाकृष्ण की पूजा
अधूरी है.
6. शंख : कृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रभु श्रीकृष्ण के नंदलाल
स्वरूप का अभिषेक एक शंख में दूध डालकर अच्छी तरह से करें। अभिषेक करने के बाद
माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक
स्थिति बेहतर हो जाएगी और आपको धन की कभी कमी नहीं होगी।
7. फल व अनाज : यदि आप
वास्तव में कृष्ण जन्मोत्सव और उपवास को सफल बनाना चाहते हैं तो जन्माष्टमी के शुभ
दिन गरीबों को फल और अनाज दान करें। आप चाहें तो किसी धार्मिक जगह जैसे मंदिर और
मठ जाकर भी गरीब लोगों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दे सकते हैं। संभव हो तो आप
किसी ज्योतिष से पूछ लें कि आपको कितना दान करना चाहिए। इस दिन दान करना वास्तव
में फलदायी होता है
8. गाय-बछड़ा : गोपाल को ग्वाrला भी कहा जाता है. गोपाल
अपनी गायों और बछड़ों के साथ घंटों रहते थे और उनकी बांसुरी पर गाएं मंत्रमुग्धप
हो जाती थीं. इसलिए इस दिन गाय-बछड़े की नन्ही प्रतिमा भगवान श्रीकृष्णको चढ़ाई जाती हैं. इनका खास महत्वै है.
9. मोर पंख : भगवान श्रीकृष्णज को मोर पंख बहुत प्रिय है. अगर
आप कान्हाय की कृपा पाने के इच्छुमक हैं तो आज के दिन मोर पंख जरूर चढ़ाएं.
10. पारिजात : हारसिंगार, पारिजात या शैफाली के फूल
श्रीकृष्ण को बहुत पसंद है. इसमें से कोई फूल आज चढ़ाते हैं तो भगवान श्रीकृष्णि
जरूर प्रसन्नर होंगे.
11.सिक्का : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा
करते समय पूजा स्थल पर कुछ सिक्के रखें और उसके बाद पूजा शुरू करें। जब पूजा खत्म
हो जाए तो उस सिक्के को उठाकर अपने बटुए में रख लें और हमेशा रखे रहें। माना जाता
है कि यह उपाय करने से लक्ष्मी जी की कृपा होती है।
12.धन कौड़ी : कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा शुरू करने से पहले 11 कौड़ियों को एक पीले वस्त्र में बांधकर पूजा स्थल पर मां
लक्ष्मी की प्रतिमा के पास रखें और भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी का पूजन एक साथ
करें। माना जाता है कि कौड़ियां मां लक्ष्मी को बहुत प्रिय हैं। पूजा समाप्त करने
के बाद कौड़ियों को पीली पोटली को अपने धन के भंडार या तिजोरी में रख दें। मां की
कृपा से आपके धन धान्य में वृद्धि हो जाएगी।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्त्व -
-भाद्रपद महीने की अष्टमी
तिथि पर पूर्णावतार योगिराज श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था ।
- इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी किया जाता है ।
-इस दिन व्रत करने से
पुण्य वृद्धि होती है ।
- जन्माष्टमी पर व्रत के साथ भगवान की पूजा और दान करने से हर
तरह की परेशानियां दूर हो जाती है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ऐसे मनाएं -
- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रीति और भक्ति के लिए उपवास
करें ।
- अपने निवास की विशेष सजावट करें ।
- सुन्दर पालने में बालरूप श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करें
।
- रात्रि बारह बजे श्रीकृष्ण की पूजन के पश्चात प्रसाद वितरण
करें ।
- विद्वानों, माता-पिता और गुरुजनों के चरण स्पर्श करें ।
- परिवार में कोई भी किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का
सेवन कदापि न करें ।
- भगवान के मंदिर जाएं।
- सूर्योदय से पहले उठें। पूरे दिन झूठ न बोलें। किसी को
परेशान न करें और मांस-मदिरा और तामसिक चीजों से दूर रहें।
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन 'श्रीकृष्ण जन्म-कथा' पठन/श्रवण/मनन का भी
विशेष पुण्यलाभ मिलाता है ।
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा इन खास चीजों के बिना मानी जाती है
अधूरी -
- आसन - श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापना सुंदर आसन पर करनी
चाहिए। आसन लाल,पीले या केसरिया रंग का व बेलबूटों से सजा होना चाहिए।
- पाद्य - जिस बर्तन में भगवान के चरणों को धोया जाता है,उसे पाद्य कहते है। इसमें शुद्ध पानी भरकर,फूलों की पंखुड़ियां डालना चाहिए।
- पंचामृत - यह शहद,घी,दही,दूध और शक्कर- इन पांचों को मिलाकर तैयार करना चाहिए। फिर
शुद्ध पात्र में उसका भोग भगवान को लगाएं।
- अनुलेपन -पूजा में
उपयोग में आने वाले दूर्वा,कुंकुम,चावल,अबीर,अगरु,सुगंधित फूल और शुद्ध जल को अनुलेपन कहा जाता है।
-आचमनीय -आचमन(शुद्धिकरण)के लिए प्रयोग में आने वाला जल
आचमनीय कहलाता है। इसमें सुगंधित द्रव्य व फूल डालना चाहिए।
- स्नानीय - श्रीकृष्ण के स्नान के लिए प्रयोग में आने वाले
द्रव्यों(पानी,इत्र व अन्य सुगंधित पदार्थ)को स्नानीय कहा जाता है।
- फूल - भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में सुगंधित और ताजे फूलों
का विशेष महत्व है। इसलिए शुद्ध और ताजे फूलों का ही प्रयोग करना चाहिए।
- भोग -जन्माष्टमी
की पूजा के लिए बनाए जा रहें भोग में मक्खन, मिश्री,ताजी मिठाइयां,ताजे फल,लड्डू,खीर,तुलसी के पत्ते शामिल करना चाहिए।
- धूप -विभिन्न पेड़ों के अच्छे गोंद तथा अन्य सुगंधित
पदाथों से बनी धूप भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय मानी जाती है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शाम तुलसी पूजन करें। तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ाकर दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी के पौधे के सामने ही बैठकर माला लेकर “ॐ वासुदेवाय नम:” का जाप दो बार पूरी माला फेरकर करें। आपकी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी और घर में समृद्धि आएगी। श्रीकृष्ण की सिखाई गई बातें युवाओं के लिए इस युग में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी अर्जुन के लिए रही थीं। उनका व्यवहारिक ज्ञान आज भी सफलता की गांरटी देता है। महाभारत के सबसे बड़े योद्धा अर्जुन ने ना केवल अपने गुरू से सीख ली बल्कि वह अपने अनुभवों से हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहे। कृष्ण कहते हैं- अर्जुन तुम मेरा चिंतन करो। लेकिन अपना कर्म करते रहो। वे अपना काम छोड़कर केवल भगवान का नाम लेते रहने का नहीं कहते। भगवान कभी भी किसी अव्यावहारिक बात की सलाह नहीं देते। गीता में लिखा है बिना कर्म के जीवन बना नहीं रह सकता। कर्म से मनुष्य को जो सिद्धि प्राप्त हो सकती है, वह तो संन्यास से भी नहीं मिल सकती। व्यक्ति को अपने स्वभाव के अनुसार काम-आजीविका चुननी चाहिए। वह काम जिसमें, उसे खुशी मिलती हो। हम अपनी प्रकृति और क्षमता के अनुसार काम करें। अपने अस्तित्व की जरूरत के अनुसार काम करें। गीता में यह भी लिखा है कि जो काम आपके हाथ में इस समय है, यानी वर्तमान कर्म उससे अच्छा कुछ नहीं है। उसे पूर्ण करो। शिक्षा और ज्ञान उसी को मिलता है, जिसमें जिज्ञासा हो। सम्मान और विनयशीलता से सवाल पूछने से ज्ञान मिलता है। जो जानकार हैं वे कोई भी बात तभी बताएंगे जब आप सवाल करेंगे। किताबों में लिखी या सुनी बातों को तर्क पर तौलना जरूरी है। जो शास्त्रों में लिखा, जो गुरु से सीखा है और जो अनुभव रहा है, इन तीनों में सही तालमेल से ज्ञान मिलता है। जो सही मात्रा में भोजन करने वाला और सही समय पर नींद लेने वाला है, जिसकी दिनचर्या नियमित है, उस व्यक्ति में योग यानी अनुशासन आ जाता है। ऐसा व्यक्ति दुखों और रोगों से दूर रहता है। गीता में लिखा है- आयु: सत्वबलारोग्यसुखप्रितीविवर्धना:। सात्विक भोजन सेहत के लिए सर्वोत्तम है। ये जीवन, प्राणशक्ति, बल, आनंद और उल्लास बढ़ाता है। सुख - दुख का आना और चले जाना सर्दी-गर्मी के आने-जाने के समान है। सहन करना सीखें। गीता में लिखा है- जिसने बुरी इच्छाओं और लालच को छोड़ दिया है, उसे शान्ति मिलती है। कोई भी इच्छाओं से मुक्त नहीं हो सकता। पर इच्छा की गुणवत्ता बदलनी होती है शिक्षा और ज्ञान उसी को मिलता है, जिसमें जिज्ञासा हो। सम्मान और विनयशीलता से सवाल पूछने से ज्ञान मिलता है। जो जानकार हैं वे कोई भी बात तभी बताएंगे जब आप सवाल करेंगे। किताबों में लिखी या सुनी बातों को तर्क पर तौलना जरूरी है। जो शास्त्रों में लिखा, जो गुरु से सीखा है और जो अनुभव रहा है, इन तीनों में सही तालमेल से ज्ञान मिलता है।