चंडीगढ़ हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि जीवन को बचाने के लिए पंचतत्वों को बचाएं। उन्होंने कहा कि बढते प्रदूषण पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम स्मार्ट सिटी तो बनाएंगे लेकिन उनमें रहने के लिए स्मार्ट लोग नहीं मिलेंगे। धरती पर हर चीज का उपयोग है, इसलिए पराली का भी सही उपयोग
तलाश कर उसे समस्या से वरदान बनाया जा सकता है।
ये उद्गार उन्होंने आज यहां पराली के प्रबंधन पर आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी के समापन सत्र में बोलते हुए व्यक्त किए। गोष्ठी का आयोजन स्थानीय सेक्टर-19 स्थित ग्राम एवं उद्योग विकास अनुसंधान केन्द्र (क्रिड) में किया गया। राज्यपाल ने आगे कहा कि यदि हम पंचतत्वों का संरक्षण नहीं करेंगे तो धरती पर से मानव ही नहीं सम्पूर्ण जीवन का अस्तित्व मिट जाएगा क्योंकि जीवन पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। उन्होंने कहा कि भगवान ने मनुष्य को बनाया और साथ ही उसकी जरूरत की सब चीजें भी बनाईं, लेकिन आदमी इस बात को नहीं समझ रहा और स्वयं ही अपने लिए परेशानियों पैदा कर रहा है। उन्होंने हाल ही में आए तूफानों के कारण जन-धन की हानि का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे तूफान विश्वभर में आम हो गए हैं। यह सब हमारी खराब जीवनशैली का परिणाम है।
उन्होंने गंगा के प्रदूषण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसके प्रति हम श्रद्धा रखते हैं उसे ही प्रदूषित कर रहे हैं। यदि ऐसे ही चलता रहा तो हम धरती को अपने रहने के लायक नहीं छोंडेगें।पराली के प्रबंधन पर क्रिड द्वारा चिंतन करने के लिए इस संस्था की सराहना करते हुए प्रो. सोलंकी ने कहा कि न्यू इंडिया बनाने में इस संस्था का बडा योगदान रहेगा। उन्होंने कहा कि क्रिड देश और पूरे मानव समाज की चिंता करता है।इससे पहले, नेशनल रेनफैड एरिया अथॉरिटी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जेएस शर्मा ने गोष्ठी के निष्कर्षों की जानकारी देते हुए कहा कि पराली के प्रबंधन व अन्य कचरे के निपटान द्वारा हम स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट गांव बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने जो नई बायोफिल नीति बनाई है वह इस काम में बडी कारगर रहेगी। इसलिए राज्यों को भी इसके अनुरूप अपनी नीति में बदलाव करने चाहिए।क्रिड के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ0 रछपाल ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्था का परिचय दिया। इस अवसर पर क्रिड के अध्यक्ष व पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 आर. पी. बम्बाह, क्रिड के निदेशक सुनील बंसल, अनेक वैज्ञानिक, पर्यावरणविद आदि उपस्थित थे।