Breaking News
जल्द ही बनेगा जेवर विधानसभा में बड़ा अस्पताल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगें शिलान्यास - प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह !  |  ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार खूनी दंगल में चित्त, हत्या के आरोप में फरार  |  ICMR की नई गाइडलाइंस:- स्वस्थ लोगों से आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट नहीं मांगे राज्य  |  बैंक से इतने रुपये कैश निकालने पर देना होगा टैक्स  |  LPG गैस सिलेंडर 1 मई से हुआ सस्ता  |  मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, Remdesivir की 4.5 लाख खुराक का होगा आयात, लगेगी अब कोरोना पर लगाम  |  हमारा परिवार पूर्वी दिल्ली इकाई द्वारा वार्षिकोत्सव बड़ी ही धूमधाम से सम्पन्न हुआ  |  एम०एस०पी० निरंतर बढती रहेगी, मंडियां होंगी अधिक मजबूत और किसानों की आय बढ़ेगी भ्रम भी होगा दूर - राजकुमार चाहर (सांसद)-राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा  |  लव जिहाद और धर्मांतरण पर सख्त हुई योगी सरकार ने नए अध्यादेश को दी मंजूरी, अब नाम छिपाकर शादी की तो होगी 10 साल कैद !   |  चौधरी चरण सिंह की विरासत को डुबोता परिवार !  |  
अपराध
By   V.K Sharma 08/05/2021 :19:51
ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार खूनी दंगल में चित्त, हत्या के आरोप में फरार
 


ओलंपिक पदक जीतने पर ईनाम के रुप में करोड़ों रुपए, सरकारी नौकरी, शौहरत ,मान सम्मान सब कुछ सुशील को मिला। इसके बावजूद उसका अपराधियों के साथ सांठगांठ कर गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त होना शर्मनाक है। अपराध जगत से जुड़ने और अपराध में शामिल होने के लिए सुशील खुद पूरी तरह जिम्मेदार है।लेकिन इसके लिए पुलिस भी पूरी तरह से कसूरवार है पुलिस अगर शुरु से ही सुशील पहलवान की हरकतों पर नजर रखती/ कार्रवाई करती तो वह शायद इतना निरंकुश नहीं हो पाता।

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) हर कोई सफल व्यक्तिअपनी सफलता को बचा कर नही रख पता ,सफलता के नशे में वो।ऐसे कारनामो को अंजाम दे देता है कि जो दुनिया उसके संम्मान में सिर झुकाती थी वही दुनिया उसको गालियां दी रही होती है ऐसा ही कुछ मशहूर पहलवान सुशील कुमार के साथ हुआ 
ओलंपिक में दो बार पदक जीत कर दुनिया में नाम कमाने वाले सुशील पहलवान की गिनती अब अपराधियों में हो गई है। सुशील पहलवान की गु़ंडोंं से सांठगांठ की खबर पहले पुलिस के अलावा एक छोटे दायरे तक ही सीमित थी। लेकिन अब एक पहलवान की हत्या में शामिल पाए जाने से उसका असली चेहरा दुनिया के सामने भी उजागर हो गया है। छत्रसाल स्टेडियम में हुए खूनी दंगल ने सुशील को अर्श से फर्श पर ऐसा दांव लगा कर चित्त कर दिया कि शायद पूरी ज़िंदगी सुशील इस हार से उबर नही पायेगा

अपराध जगत से जुड़ने और अपराध में शामिल होने के लिए सुशील खुद पूरी तरह जिम्मेदार है।लेकिन इसके लिए पुलिस भी पूरी तरह से कसूरवार है पुलिस अगर शुरु से ही सुशील पहलवान की हरकतों पर नजर रखती/ कार्रवाई करती तो वह शायद इतना निरंकुश नहीं हो पाता। पुलिस के निकम्मेपन या मिलीभगत के कारण ही पेशेवर गु़ंडे तो बेखौफ होते ही हैंं। लेकिन सुशील जैसों के मन से भी कानून का डर निकल जाता है।
कल तक पूरी दुनिया में पहचान बनाने  वाला अब पुलिस से बचने के लिए मुंह छिपाता भाग रहा है। कल तक गले में पदक पहना कर जिस सुशील की तस्वींरें खींची जाती थी।अब पुलिस उसके हाथ में अपराधी के नाम वाली तख्ती पकड़ा कर फोटो खींचेगी। 
ओलंपिक में भारत का नाम रौशन करने के लिए सुशील का नाम सम्मान से लिया जाता था। मुलजिम सुशील अदालत में हाजिर हो अब उसे ऐसे पुकारा जाएगा। अब थाना,जेल और अदालत के चक्कर लगाएगा। अदालत में कठघरे में खड़ा होगा।
सब कुछ मिला फिर भी संतुष्ट नहीं-
ओलंपिक पदक जीतने पर ईनाम के रुप में करोड़ों रुपए, सरकारी नौकरी, शौहरत ,मान सम्मान सब कुछ सुशील को मिला। इसके बावजूद उसका अपराधियों के साथ सांठगांठ कर गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त होना शर्मनाक है। 
पुलिस को चार मई को आधी रात के बाद छत्रसाल स्टेडियम में गोलियां चलने की सूचना मिली। घायल पहलवान सागर  ( 23) निवासी (माडल टाउन थर्ड एम 2/1), सोनू निवासी एमसीडी कालोनी और अमित कुमार निवासी रोहतक को पीसीआर अस्पताल ले गई। सागर की मौत हो गई। सागर के पिता अशोक दिल्ली पुलिस में हवलदार हैं।
खूनी दंगल का सूत्रधार  करोड़ो की संपत्ति ?
पुलिस सूत्रों के अनुसार माडल टाउन तीन स्थित (एम 2/1 ) करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए सुशील ने हरियाणा के कुख्यात बदमाश काला जठेड़ी के खास साथी सोनू महाल और पहलवान सागर आदि को वहां रखा हुआ था। सुशील अब उनसे संपत्ति खाली कराना चाहता था। सोनू ने संपत्ति खाली करने से इंकार कर दिया। इस बात को लेकर सुशील का उनसे कुछ दिन पहले भी  झगड़ा हुआ था। काला जठेड़ी ने उस समय समझौता करा दिया और सुशील से कह दिया कि संपत्ति बेच कर हिस्सा आपस में हिस्सा कर लेंगे। सागर पहले स्टेडियम में ही रहता था।
चार मई की रात को सुशील अपने चेलों और गु़ंडो के साथ उस संपत्ति पर गया वहां से सोनू ,सागर और अमित आदि को उठा कर स्टेडियम में ले गए। वहां पर इन सबको फावड़े के हत्थे से पीटा गया। इस दौरान गोलियां भी चलाई गई। 
सुशील ने जिस संपत्ति को लेकर यह अपराध तक कर दिया उसका असली मालिक कौन है और सुशील ने वह संपत्ति किस तरीके से कब्जाई इसका खुलासा पुलिस को करना चाहिए ।
गैंगवार भी इस कांड में संभावित है  ? -
पुलिस सूत्रों के अनुसार सुशील ने वारदात के बाद हरियाणा के बदमाश काला जठेड़ी से  संपर्क किया। सुशील ने काला से कहा कि उससे गलती हो गई। वह तो सोनू आदि को इसलिए उठा कर लाया था कि थप्पड़ चट्टू मार कर, धमका कर उससे संपत्ति खाली करा लेगा। 
सूत्रों का कहना है कि काला जठेड़ी ने सुशील से कहा कि, तूने यह ठीक नहीं किया। अब तेरी हमारी आमने सामने की होगी। 
सुशील चाहता था कि काला जठेड़ी सोनू को उसके खिलाफ बयान देने से मना कर दें। लेकिन सोनू ने सुशील के खिलाफ बयान दे दिया है। सोनू काला जठेड़ी का खास साथी है वह हत्या के अनेक मामलों में आरोपी है।
इसलिए अब यह आशंका है कि सुशील पहलवान और काला जठेड़ी के बीच गैंगवार हो सकती है।
सुशील की काला जठेड़ी के अलावा सुंदर भाटी, नीरज बवानिया समेत अनेक कुख्यात बदमाशों से सांठगांठ है। ये सब मिलकर टोल टैक्स, अवैध कब्जा और विवादित संपत्ति आदि का धंधा करते है। यह सारे गुंडे स्टेडियम में आते रहते है। लेकिन दिल्ली पुलिस के अलावा सब को ये दिखाई दे रहा था। इस पत्रकार ने साल 2017 में एक लेख में यह खुलासा कर पुलिस अफसरों को आगाह किया था कि सुशील और बंदूकधारी गुंडों का स्टेडियम में जमावड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। पुलिस वहां नजर रखे तो गुंडों को पकड़ सकती है। 
चार मई की रात जो हुआ उसके लिए पुलिस ही जिम्मेदार है।
इससे  पता चलता है कि पुलिस की सुशील से या तो सांठगांठ थी या यह पुलिस का जबरदस्त निकम्मापन है। दोनों ही सूरत में पुलिस दोषी है।
पुलिस अगर गंभीर होती और छत्रसाल स्टेडियम पर नजर रखती तो वहां आने जाने वाले बदमाशों को गिरफ्तार भी कर सकती थी। 
पुलिस सूत्रों के अनुसार काला जठेड़ी के भाई को जब कभी हरियाणा पुलिस भी पूछताछ के लिए उठाती है तब भी सुशील अपने नाम और रसूख का इस्तेमाल कर उसकी मदद करता है।

सूत्रों के अनुसार वारदात के अगले दिन यानी बुधवार की दोपहर (एक, डेढ़ बजे) तक सुशील दिल्ली में ही मौजूद था। 
यह भी पता चला है कि सुशील कोशिश कर रहा है कि पुलिस उसे इस मामले में बचा ले तो वह अन्य अभियुक्तों को पुलिस के सामने पेश कर देगा। बताया तो यह तक जाता है कि सुशील के कई साथी /चेले पुलिस के सामने पेश हो कर हत्या की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने को भी तैयार है।
सूत्रों के अनुसार बुधवार दोपहर तक सुशील दिल्ली में घूम कर अपने बचाव में जुटा हुआ था। जैसे ही उसे पहलवान सागर की मौत की सूचना मिली वह दिल्ली से बाहर भाग गया। उसके फोन की लोकेशन पश्चिम उत्तर प्रदेश के बाद बंद हो गई थी। पुलिस को पता चला कि वह रामदेव या अपने डीएसपी पहलवान दोस्त अनुज चौधरी के पास भी मदद के लिए जा सकता है या दिल्ली एनसीआर में कहीं छिपा हुआ है।
पुलिस को यह भी पता चला है कि वह आत्म समर्पण भी कर सकता है।
खूनी दंगल।में पार्षद के बेटे की भूमिका
इस मामले में आरोपी अजय कांग्रेस के निगम पार्षद सुरेश पहलवान( बक्करवाला) का बेटा है। सुरेश बक्करवाला दिल्ली पुलिस का बरखास्त सिपाही है। सुरेश बक्करवाला को 1993 में 49 लाख रुपए लूटने के मामले में  करोल बाग पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में सरेश के अलावा दिल्ली पुलिस के ही बरखास्त सिपाही जगवीर उर्फ जग्गा को भी गिरफ्तार किया गया था।
लॉकडाउन में गुंडे कारों में कैसे घूमते रहे?- 
दिल्ली में लॉक डाउन लगा हुआ है उसके बावजूद पांच गाड़ियों में सवार हथियारबंद पहलवान और बदमाश स्टेडियम में कैसे पहुंच गए ? ये सब जिन रास्तों से आए वहां पर मौजूद पुलिस ने वाहनों की चेंकिंग की होती तो यह तभी पकडे़ जा सकते थे।
एक गाड़ी से दोनाली बंदूक बरामद हुई अगर पुलिस कार की चेकिंग करती तो बंदूक आसानी से दिखाई दे जाती। 
पुलिस की भूमिका पर सवाल-
दूसरी ओर इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैंं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस ने घायलों के बयानों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की। पुलिस ने ऐसा करके क्या  सुशील को बचाया है? क्योंकि इसका फायदा सुशील को अदालत में मिल सकता है।
पुलिस अगर सागर की मौत से पहले उसका भी बयान दर्ज कर लेती तो यह पुलिस के पास अभियुक्तों के खिलाफ मजबूत सबूत होता। 
पुलिस ने पीसीआर काल और थाने में दर्ज डीडी एंट्री के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। 
पुलिस ने एफआईआर में लिखा है कि गोलियां चलने की सूचना मिली थी। पुलिस घटनास्थल पर गई तो पता चला कि घायलों को पीसीआर अस्पताल ले गई है। सरसरी दरयाफ़्त से पता चला कि सुशील और उसके साथियों ने वारदात को अंजाम दिया है। 
माडल टाउन पुलिस को जब पता चल गया था कि घायलों को पीसीआर अस्पताल ले गई है तो पुलिस को अस्पताल जाकर घायलों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी। 
पुलिस ने इस मामले में सुशील के साथी आसोधा गांव निवासी  प्रिंस दलाल को बुधवार को बंदूक के साथ गिरफ्तार किया था। प्रिंस के मोबाइल से पुलिस को एक वीडियो मिला है जिसमें सोनू,सागर और अमित की पिटाई करने वाले दिखाई
पहले भी एफआईआर-
साल 2018 में भी सुशील पहलवान और उसके साथियों के खिलाफ पहलवान प्रवीण राणा की शिकायत पर आईपी स्टेट थाने में मारपीट का मामला दर्ज किया गया था। इंदिरा गांधी स्टेडियम में कुश्ती ट्रायल के दौरान पहलवान प्रवीण और उसके साथियों के साथ मारपीट की गई थी। पुलिस ने सुशील को गिरफ्तार नहीं किया।
छत्रसाल स्टेडियम बना गु़ंडोंं का अड्डा-
वैसे इस स्टेडियम से बदमाशों का पुराना नाता है। दो दशक पहले की बात है कि एक बार दिचांऊ के कुख्यात गुंडे कृष्ण पहलवान को जबरन वसूली के मामले में पुलिस तलाश कर रही थी। उस दौरान कृष्ण स्टेडियम में आयोजित समारोह में सतपाल पहलवान के साथ पुरस्कार बांट रहा था। इसका खुलासा उस समय इस पत्रकार ने किया था। कृष्ण पहलवान को गिरफ्तार करने के बाद अपराध शाखा के तत्कालीन डीसीपी कर्नल सिंह ने भी यह बात मीडिया को बताई। सतपाल दिल्ली सरकार में खेल निदेशक के पद पर था। एक सरकारी अफसर की इस तरह की हरकत बहुत ही गंभीर अपराध है। लेकिन नामी पहलवान होने के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सुशील का रसूख का परिणाम डेपुटेशन से डेपुटेशन ?- 
सतपाल पहलवान का दामाद सुशील पहलवान मूल रुप से रेलवे का अधिकारी है रेलवे से वह उत्तर दिल्ली नगर निगम में डेपुटेशन पर गया और वहां से वह दिल्ली सरकार में डेपुटेशन पर चला गया। डेपुटेशन से ही दूसरी जगह  डेपुटेशन पर इस तरीक़े से जाना भी उसके रसूख को दिखाता है। करीब पांच साल से वह छत्रसाल स्टेडियम में ओएसडी (खेल) के पद पर है।



V.K Sharma
Editor in Chief
Live Tv
»»
Video
»»
Top News
»»
विशेष
»»


Copyright @ News Ground Tv