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न्यूज़ ग्राउंड विशेष
By   V.K Sharma 21/09/2019 :15:32
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीखों का किया ऐलान, ये 4 मुद्दे हो सकते हैं भाजपा के लिए गेमचेंजर !
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नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा :  चुनाव आयोग की तरफ से महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को मतदान होगा. दोनों ही राज्यों में 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार को तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि दीवाली के त्योहार से पहले चुनाव की पूरी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी.. बता दें कि महाराष्ट्र में विधानसभी की कुल 288 सीटें हैं जबकि हरियाणा में सीटों की संख्या 90 है. पिछले चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन की सरकार है, वहीं हरियाणा में बीजेपी ने बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. इन दोनों राज्यों में बीजेपी को उम्मीद है कि वह एक बार फिर सत्ता में आएगी. वहीं, कांग्रेस भी अपनी जमीन दोबारा तलाशने की कोशिश करेगी. पीएम मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर दी है. पीएम ने राज्य की जनता से अपील की है कि वह देश और समाज हित में एक बार फिर सत्ता में बीजेपी को ही लेकर आएं. 
महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों से जुड़ी पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
नॉटिफिकेशन की तारीख – 27 सितंबर
नामांकन की आखिरी तारीख - 4 अक्टूबर
स्क्रूटनी की तारीख – 5 अक्टूबर
नामांकन वापसी की तारीख – 7 अक्टूबर
चुनाव प्रचार का आखिरी दिन – 19 अक्टूबर
21 अक्टूबर को दोनों राज्यों में होगा मतदान
24 अक्टूबर को आएंगे नतीजे

महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ ही कुछ अन्य राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव भी होना है. चुनाव आयोग की ओर से इनकी तारीखों का ऐलान भी किया गया है.

- महाराष्ट्र में 2 नवंबर और हरियाणा में 9 नवंबर को सरकार खत्म हो रही है. हरियाणा में 90 सीट, जिसमें 17 एससी रिजर्व है. वहीं महाराष्ट्र में कुल 288 सीट है.
- मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चंद्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं.
- हरियाणा में कुल 1.8 करोड़ और महाराष्ट्र में 8.94 मतदाता हैं.
- मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य सभी विभागों से भी बात हुई है.
- चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले सभी राजनीतिक पार्टियों, पुलिस और कलेक्टरों से भी बात की गई है.
- हरियाणा में 1.3 लाख ईवीएम जबकि महाराष्ट्र में 1.8 लाख ईवीएम का इस्तेमाल होगा.
- सोशल मीडिया पर भी आचार संहिता के दौरान नजर रखी जाएगी.
- उम्मीदवारों को हथियार जमा करना होगा और खर्च निगरानी के लिए पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे.
दरअसल, लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले ये देश में पहले चुनाव में हैं. ऐसे में इन चुनाव के नतीजों को केंद्र सरकार के सौ दिनों से जोड़ा जा सकता है, साथ ही इस बात पर भी फैसला हो सकता है कि जो मूड जनता का केंद्र की सरकार के लिए था, क्या वही राज्य सरकार के लिए भी है. इन चार महीनों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म हो गई, तीन तलाक के खिलाफ बिल ने कानूनी रूप ले लिया है, साथ ही ऐसे कई मसले हैं, जिनका राष्ट्रीय राजनीति पर फर्क पड़ा है. इन्हीं कुछ मामलों को जानें-

1. लोकसभा चुनाव के बाद पहला चुनाव : ये विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के चार महीने बाद हो रहे हैं. ऐसे में इन्हीं भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का लिटमेस टेस्ट भी कहा जा रहा है. महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही राज्यों में लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी संख्या में जीत हासिल हुई थी.

2. अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला चुनाव : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को कमजोर किए जाने के फैसले को मोदी सरकार का बड़ा कार्ड माना गया. देशभर में इसकी चर्चा हुई, पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ से आवाज़ें उठीं. सरकार का कहना है कि उन्होंने देश के मन की आवाज़ सुनी है, ऐसे में आने वाले चुनावों में इन मुद्दों पर बहस और भी तेज हो सकती है. नासिक में हुई प्रधानमंत्री मोदी की रैली में इस बात का संकेत भी सामने आया था.

3. तीन तलाक कानून के बाद पहला चुनाव : मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए भारतीय जनता पार्टी लगातार तीन तलाक बिल लाने की बात कर रही थी. पिछले कार्यकाल में तो ये बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार दोनों सदनों से बिल को हरी झंडी मिली. अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मुद्दे को चुनावी माहौल में भी उठाया जा सकता है.

4. राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की पहली परीक्षा : लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बड़ी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. देश की सबसे पुरानी पार्टी में नेतृत्व का संकट हुआ तो एक बार फिर कमान सोनिया गांधी के हाथ में पहुंची. लोकसभा चुनाव में राहुल ने जिन मुद्दों पर दांव लगाया, उनपर सफलता नहीं मिल सकी. ऐसे में अब इन चुनावों के दम पर कांग्रेस को उम्मीद है कि वह सोनिया गांधी की अगुवाई में कुछ जादू बिखेरने में सफल होगी.
इन बड़े मसलों के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जो इन चुनावों में देखने को मिल सकते हैं. मौजूदा अर्थव्यवस्था का दौर, नौकरियों की चिंता के बहाने विपक्ष एक बार फिर मोदी सरकार को निशाने पर ले सकता है.



V.K Sharma
Editor in Chief
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